नशा, शक और खुनी वारदात! फिर ये हुआ? 12 दिन पहले ही तोड़े थे पत्नी के पैर, पढ़ें पूरी कहानी

उन्नाव/बांगरमऊ। रिपोर्ट : संतोष अवस्थी, ब्यूरो चीफ

बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के नौनिहालगंज मोहल्ले में मंगलवार रात घरेलू हिंसा ने खौफनाक रूप ले लिया। शराब के नशे में धुत ई-रिक्शा चालक ने पहले अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या की और फिर खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई, जबकि दो मासूम बच्चे माता-पिता दोनों को खोकर अनाथ हो गए।

पहले डंडे से पीटा, फिर रस्सी से गला घोंटा

मृतक की पहचान संजय गुप्ता (42) के रूप में हुई है, जो ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी पत्नी वंदना (38) का शव घर के बाहरी कमरे में खून से लथपथ हालत में मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक वंदना के शरीर पर डंडे से हमले की पांच गंभीर चोटें थीं और गला कसकर हत्या की पुष्टि हुई है।

हत्या के बाद संजय घर की छत पर गया और आंगन के जाल में रस्सी बांधकर फंदा लगा लिया। उसकी मौत हैंगिंग से होना पाई गई।

सुबह खुला राज, दरवाजा तोड़कर निकाला शव

बुधवार सुबह पड़ोसियों ने संजय का शव घर के पीछे दीवार के सहारे फंदे से लटका देखा, जिसके बाद उसकी मां सियादुलारी को सूचना दी गई। मां जब बहू को बुलाने पहुंचीं तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक दरवाजा न खुलने पर पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, जहां वंदना का शव जमीन पर पड़ा मिला।

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Unnao Just 12 days after breaking his wifes legs with beating the husband attempted suicide

शराब, शक और हिंसा से भरा था जीवन

मृतक की मां सियादुलारी ने बताया कि संजय शराब का आदी था और नशे में अक्सर आपा खो देता था। वह पत्नी पर शक करता था और मोबाइल पर वीडियो कॉल करने के आरोप में मारपीट करता था। हालांकि पुलिस जांच में किसी भी तरह के अवैध संबंध या कॉल का कोई प्रमाण नहीं मिला।

मां ने बताया कि करीब 12 दिन पहले भी संजय ने वंदना को इतनी बुरी तरह पीटा था कि उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया था, लेकिन उस समय कोई तहरीर नहीं दी गई। एक साल पहले भी संजय ने छत से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी, तब पुलिस ने उसकी जान बचाई थी।

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आपराधिक इतिहास भी रहा है संजय का

संजय का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। मां के अनुसार वह एक साल पहले कानपुर में ई-रिक्शा चोरी के मामले में जेल गया था और छह महीने पहले ही जमानत पर छूटकर आया था। पैसों और शराब को लेकर घर में आए दिन झगड़े होते थे।

बच्चों को पहले ही भेज दिया था रिश्तेदार के घर

बेटे के गुस्से और हिंसक व्यवहार से डरकर सियादुलारी अपने पौत्र हर्ष और पौत्री खुशी को घर में नहीं रखती थीं। वे दोनों करीब 700 मीटर दूर रिश्तेदार नन्हक्के के घर रहते थे, जिससे वे इस वारदात के समय घर में मौजूद नहीं थे।

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टूट चुका है पूरा परिवार

संजय परिवार का इकलौता सहारा नहीं था। सियादुलारी ने बताया कि उनका बड़ा बेटा संतोष 30 साल से लखनऊ में रह रहा है और कोई संबंध नहीं रखता। दूसरा बेटा सजीवन 25 साल से अलग है। तीसरा बेटा पप्पू 14 साल पहले फतेहगढ़ जेल में मौत का शिकार हो गया था। अब इस घटना के बाद वृद्ध मां के कंधों पर दो मासूम बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई है।

पुलिस जांच जारी

घटना की सूचना पर सीओ संतोष सिंह और कोतवाल अखिलेश पांडेय मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर मृतका का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। बांगरमऊ कोतवाली प्रभारी के अनुसार मां की तहरीर पर कार्रवाई की जा रही है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

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