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उन्नाव जिला अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल, पत्रकार से अभद्रता के मामले में नौ दिन बाद भी कार्रवाई शून्य

रिपोर्ट: रागिनी द्विवेदी, संवाददाता
उन्नाव।
जिला उन्नाव सदर स्थित उमाशंकर दीक्षित चिकित्सालय एक बार फिर विवादों में है। पत्रकार से कथित अभद्रता के मामले में नौ दिन बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार एक्स-रे टेक्नीशियन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई न होने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला निपुण भारत/रागिनी द्विवेदी की खास रिपोर्ट के जरिए सामने आया है।

आरोप है कि पत्रकार से ऑन-कैमरा गाली-गलौज और धमकी देने की घटना के बाद सीएमएस को लिखित शिकायत सौंपी गई थी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। जब शिकायत की प्रगति के बारे में जानकारी ली गई तो कार्यालय से “शिकायती पत्र खो जाने” की बात कही गई, जिससे लापरवाही और जवाबदेही पर संदेह और गहरा गया।

सूत्रों के मुताबिक, घटना का CCTV फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद उसकी जांच न होने से सीएमएस और डिप्टी सीएमएस की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित एक्स-रे टेक्नीशियन वीरेंद्र सिंह यादव के खिलाफ पहले से भी कई विभागीय शिकायतें लंबित हैं, फिर भी अब तक कोई अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया गया। इससे यह चर्चा तेज है कि आखिर उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है।

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स्थानीय लोगों और अस्पताल से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से आरोपित के हौसले बढ़े हुए हैं। भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता से जुड़ी खबरें प्रकाशित होने के बाद कथित तौर पर नाराज एक्स-रे टेक्नीशियन ने पत्रकार से अभद्रता की, जो सरकारी संस्थानों में प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि दिनदहाड़े पत्रकार से हुई अभद्रता के बावजूद अब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या शिकायत का “खो जाना” महज संयोग है या फिर किसी को बचाने की कोशिश? अस्पताल प्रशासन की चुप्पी और देरी ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील सार्वजनिक संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाते हैं—या फिर यह प्रकरण भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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