ताज़ा खबरेंनई दिल्लीबड़ी खबर

नई दिल्ली: भारत ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य में दर्ज की बड़ी प्रगति, पर नई चुनौतियां बनीं चिंता

नई दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर अहम चर्चा के बीच फार्मा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली में आई प्रगति को सराहा, लेकिन साथ ही मोटापा, डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य जैसी उभरती समस्याओं पर तत्काल नीति हस्तक्षेप की जरूरत भी बताई।

नमित जोशी, जो फार्माएक्ससिल के चेयरमैन हैं, ने आर्थिक सर्वेक्षण पर समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि भारत ने पिछले दशक में सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, खासकर मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर।

हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अब देश के सामने नई स्वास्थ्य चुनौतियां तेजी से उभर रही हैं, जिनसे निपटने के लिए समय रहते नीति और जागरूकता दोनों स्तरों पर कदम उठाने होंगे।


मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट

जोशी के अनुसार भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में मातृ मृत्यु दर (MMR) में आई तेज गिरावट शामिल है। उन्होंने कहा कि जहां वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु दर में औसतन 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, वहीं भारत ने लगभग 86 प्रतिशत की गिरावट हासिल की है।

सरकारी प्रयासों का असर

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के लगातार प्रयासों का परिणाम है, जिनका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना रहा है। सुरक्षित प्रसव, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


शिशु और बाल मृत्यु दर में भी सुधार

आर्थिक सर्वे के हवाले से जोशी ने बताया कि भारत में शिशु मृत्यु दर (IMR) में भी पिछले दशक के दौरान लगभग 37 प्रतिशत की कमी आई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें  गंगा की गोद में पलता प्रदूषण! उन्नाव के दही औद्योगिक क्षेत्र में अवैध खेल, नोटों की गड्डियों से चल रही ‘व्यवस्था’

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता और पोषण कार्यक्रमों ने बच्चों के जीवन की शुरुआत को अधिक सुरक्षित बनाया है।


मोटापा नई राष्ट्रीय चुनौती बनता हुआ

जोशी ने चेतावनी दी कि देश में मोटापा तेजी से बढ़ती समस्या के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की खपत में लगभग 150 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है, जो मोटापे का एक बड़ा कारण बन रही है।

मोटापे से जुड़ी गंभीर बीमारियां

मोटापे के कारण हृदय रोग, मधुमेह, किडनी की समस्याएं, नसों से जुड़ी बीमारियां और आंखों की जटिलताएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ेगा और इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे फिट इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया जैसे अभियानों का उद्देश्य लोगों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है।


डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार

जोशी ने डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म के विस्तार को भी भारत की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और ई-संजीवनी जैसी पहलों ने स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने में मदद की है।

ग्रामीण क्षेत्रों को मिला लाभ

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अब डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श ले पा रहे हैं। आशा कार्यकर्ताओं के नेटवर्क ने भी इन सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद की है।

यह भी पढ़ें  स्वतंत्रता दिवस 2026 पर नरेश कुमार कुमावत की कला में दिखा राष्ट्रनायकों का गौरव

डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य नई चिंता

जोशी ने कहा कि आर्थिक सर्वे में डिजिटल लत को भी एक गंभीर उभरती समस्या बताया गया है, खासकर बच्चों और युवाओं के बीच। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फ्रांस जैसे देशों ने कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू किए हैं।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और शारीरिक गतिविधि कम होने से मोटापा भी बढ़ता है।

आपस में जुड़ी समस्याएं

जोशी के अनुसार मोटापा, डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत नीति और जनजागरूकता अभियान के माध्यम से हल करने की जरूरत है।


API सेक्टर में आत्मनिर्भरता की जरूरत

जोशी ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) के मामले में आयात पर निर्भरता को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योग को मिलकर काम करना होगा।

फार्मा निर्यात के लिए अवसर

उन्होंने कहा कि खासकर यूरोपीय संघ के साथ होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय फार्मा उद्योग के लिए नए अवसर खोल सकते हैं। टैरिफ बाधाएं कम होने से भारत के फार्मा निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है, हालांकि कुछ नियामकीय चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button