यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी व निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
लखनऊ में कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला, शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा

राजधानी लखनऊ में हुई अहम कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि अब शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और उनके आश्रित परिवार सरकारी तथा पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।
सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लंबे समय से शिक्षक संगठनों द्वारा चिकित्सा खर्च को लेकर राहत देने की मांग उठाई जा रही थी, जिसे अब सरकार ने नीति स्तर पर स्वीकार किया है।
इस फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब इलाज के दौरान होने वाले बड़े खर्च से कर्मचारियों को राहत मिलेगी और गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज में देरी की समस्या भी कम होगी।
किन कर्मचारियों को मिलेगा योजना का लाभ
सरकार के फैसले के अनुसार यह सुविधा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों, व्यावसायिक विषय विशेषज्ञों और मानद शिक्षकों को भी दी जाएगी।
इसके अलावा संस्कृत शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त सहायता प्राप्त और स्व-वित्तपोषित विद्यालयों के कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
सरकारी व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय पर काम कर रहे व्यावसायिक विशेषज्ञ और उनके परिवार भी अब इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े कर्मियों को भी मिलेगा कवरेज
सरकार ने योजना का दायरा केवल माध्यमिक स्तर तक सीमित नहीं रखा है। बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े स्कूलों में कार्यरत पैरा-टीचर, विशेष शिक्षक और प्रशिक्षकों को भी इस सुविधा में शामिल किया गया है।
इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डन, पूर्णकालिक और अंशकालिक शिक्षक तथा प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों और उनके आश्रितों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।
लाखों परिवारों को सीधे मिलेगा फायदा
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि इस फैसले से लगभग 2.97 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है, जिस पर करीब 89 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च आएगा।
वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जानकारी दी कि केवल बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े लगभग 11.95 लाख लोगों को इस योजना से लाभ मिलेगा। उनके अनुसार प्रति कर्मचारी लगभग 3,000 रुपये प्रीमियम के आधार पर कुल वार्षिक खर्च 358 करोड़ रुपये के आसपास होगा।
दोनों विभागों को मिलाकर देखा जाए तो करीब 15 लाख शिक्षक, कर्मचारी और उनके परिवार इस योजना के दायरे में आएंगे और कुल वार्षिक व्यय लगभग 448 करोड़ रुपये आंका गया है।
सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
योजना के तहत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों के अलावा पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुरूप होंगी, ताकि इलाज की प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित बनी रहे।
सत्यापन के बाद मिलेगा लाभ
स्व-वित्तपोषित विद्यालयों के कर्मचारियों के लिए पहले सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में समिति गठित की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग पहले से किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत कवर हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा, ताकि दोहरी सुविधा से बचा जा सके।
कर्मचारियों के लिए राहत, शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद
शिक्षा विभाग से जुड़े कई कर्मचारियों का कहना है कि अब तक गंभीर बीमारी की स्थिति में निजी अस्पतालों का खर्च उठाना मुश्किल होता था, जिसके कारण कई बार इलाज टालना पड़ता था। कैशलेस सुविधा मिलने से अब समय पर उपचार संभव होगा।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से कर्मचारियों के बीच नौकरी को लेकर भरोसा बढ़ेगा और कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वस्थ कर्मचारी ही बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं।
आने वाले महीनों में इस योजना के लागू होने की प्रक्रिया तेज की जाएगी, ताकि नए शैक्षणिक सत्र से पहले अधिकतम कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सके।
इस फैसले के साथ राज्य सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कर्मचारियों की सुविधाओं को आगे भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचे।





