iLive Connect: अब घर बनेगा स्मार्ट ICU, AI रखेगा आपकी धड़कनों पर नज़र; अस्पतालों की छुट्टी!
भारत में लॉन्च हुआ iLive Connect, एक AI-पावर्ड डॉक्टर-लेड इकोसिस्टम जो आपके घर को ICU में बदल देता है। जानें कैसे यह बायोसेन्सर पैच और रिस्टबैंड 24/7 आपकी सेहत पर नज़र रखते हैं।

नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर का बेडरूम एक हाई-टेक ICU (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में तब्दील हो सकता है? क्या यह मुमकिन है कि आप सो रहे हों और कोसों दूर बैठा कोई डॉक्टर आपकी बिगड़ती सेहत का अंदाज़ा आपको लक्षण दिखने से पहले ही लगा ले? भारत में स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) के क्षेत्र में एक ऐसी ही क्रांतिकारी दस्तक हुई है, जो खासतौर पर बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है।
इस तकनीक का नाम है iLive Connect। यह केवल एक गैजेट नहीं, बल्कि एक पूरा AI-पावर्ड ‘हेल्थकेयर इकोसिस्टम’ है, जो अस्पताल की दीवारों के बाहर भी मरीज को 24/7 डॉक्टर की निगरानी में रखता है।
क्या है iLive Connect और यह कैसे काम करता है?
iLive Connect एक अत्याधुनिक प्रेडिक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम है। सरल भाषा में कहें तो, यह एक ‘पर्सनल बॉडीगार्ड’ की तरह काम करता है जो आपकी नसों में होने वाली छोटी सी हलचल को भी पढ़ लेता है। इसमें एक छोटा सा वायरलेस बायोसेन्सर पैच होता है जिसे छाती पर लगाया जाता है और एक स्मार्ट रिस्टबैंड होता है जिसे कलाई पर पहना जाता है।
ये दोनों डिवाइस मिलकर मरीज के शरीर के ‘वाइटल साइन्स’ (Vitals) को ट्रैक करते हैं। डेटा यहाँ से सीधा सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म पर जाता है, जहाँ से इसे एक सेंट्रल मेडिकल कमांड सेंटर में भेजा जाता है। इस कमांड सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ 24 घंटे तैनात रहते हैं।

सिर्फ 2 मिनट में एक्शन: जब AI बनता है जान बचाने वाला
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसका रिस्पांस टाइम है। शरीर में किसी भी संभावित खतरे का संकेत मिलते ही, कमांड सेंटर में बैठे डॉक्टर सक्रिय हो जाते हैं। वे मरीज या उनके परिवार को महज दो मिनट के भीतर कॉल या अलर्ट के जरिए सूचित करते हैं। इतना ही नहीं, डॉक्टर तुरंत यह भी बताते हैं कि अस्पताल पहुँचने से पहले या एम्बुलेंस आने तक क्या प्राथमिक उपचार (First Aid) करना है।
डॉक्टरों की राय: अस्पताल जाने की ज़रूरत होगी कम
iLive Connect के फाउंडर और मशहूर कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. राहुल चंदोला के मुताबिक, “यह तकनीक प्रेडिक्टिव मॉनिटरिंग (Predictive Monitoring) को संभव बनाती है। अक्सर बीमारियाँ तब पता चलती हैं जब लक्षण गंभीर हो जाते हैं, लेकिन यह सिस्टम उन सूक्ष्म परिवर्तनों को पकड़ लेता है जो बीमारी शुरू होने का संकेत देते हैं। इससे समय रहते इलाज शुरू हो जाता है और मरीज को बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती।”
वहीं, सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और को-फाउंडर डॉ. विवेका कुमार इसे ‘दुनिया का पहला डॉक्टर-लेड AI हेल्थकेयर इकोसिस्टम’ बताते हैं। उनके अनुसार, “यह तकनीक मरीज के घर में प्रभावी ढंग से ICU जैसी सुविधा लाती है।”
किन पैरामीटर्स पर रहती है पैनी नज़र?
iLive Connect का बायोसेन्सर पैच और रिस्टबैंड किसी आम स्मार्टवॉच से कहीं ज्यादा एडवांस हैं। यह निम्नलिखित डेटा को रियल-टाइम में ट्रैक करता है:
- Two-Lead ECG: हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधि की सटीक जानकारी।
- Heart Rate & SpO2: धड़कन और ऑक्सीजन का स्तर।
- Respiratory Rate: सांस लेने की दर।
- Body Temperature: शरीर का तापमान।
- Blood Pressure Trend: बीपी में होने वाले उतार-चढ़ाव।
- Sleep Analysis: आप कितनी देर और कैसी नींद सोए, इसका बारीक विश्लेषण।
डॉ. विवेका कुमार बताते हैं कि यदि कोई मरीज ठीक से सो नहीं पा रहा है, तो सिस्टम यह डेटा भी डॉक्टरों तक पहुँचाता है। कई बार नींद न आना हृदय रोग या अन्य मानसिक तनाव का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
बुजुर्गों और डिस्चार्ज हुए मरीजों के लिए ‘सुरक्षा कवच’
अक्सर देखा गया है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के शुरुआती 10-15 दिन मरीज के लिए सबसे जोखिम भरे होते हैं। अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण होती है। iLive Connect ऐसे ही ‘हाई-रिस्क’ वाले लोगों के लिए डिजाइन किया गया है।
हाल ही में हुई एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी के परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं। 410 मरीजों पर 10 हफ्तों तक की गई स्टडी में पाया गया कि इस सिस्टम के इस्तेमाल से मरीजों के दोबारा अस्पताल में भर्ती होने (Readmission) की दर में 76% की भारी कमी आई है। इसने ब्लड प्रेशर की अस्थिरता, दिल की बीमारियों और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी समस्याओं को गंभीर होने से पहले ही पहचान लिया।
हेल्थकेयर का भविष्य है AI
भारत जैसे देश में, जहाँ डॉक्टरों और मरीजों का अनुपात अभी भी एक चुनौती है, iLive Connect जैसी तकनीक एक बड़ी खाई को पाट सकती है। FDA और CE से मान्यता प्राप्त यह डिवाइस न केवल जान बचाती है, बल्कि मेडिकल खर्चों को भी कम करती है क्योंकि शुरुआती पहचान से बड़े ऑपरेशनों या लंबे समय तक अस्पताल में रहने का खर्च बच जाता है।
अगर आपके घर में भी बुजुर्ग हैं या कोई ऐसी बीमारी है जिसे लगातार निगरानी की जरूरत है, तो iLive Connect भविष्य की वह तकनीक है जो आज आपके पास उपलब्ध है।





