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गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध: रायबरेली पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- ‘हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद है, हिंसा नहीं’

रायबरेली/लखनऊ। गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने और गोहत्या के खिलाफ निर्णायक जंग का शंखनाद करने के लिए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती महाराज काशी से रायबरेली पहुँच चुके हैं। 11 मार्च को लखनऊ में होने वाले ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ से पहले महाराजश्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह लड़ाई वैचारिक है, जहाँ अस्त्र ‘शास्त्र और संवाद’ होंगे, हिंसा के लिए यहाँ कोई स्थान नहीं है। काशी से शुरू हुई यह यात्रा जैसे-जैसे लखनऊ की ओर बढ़ रही है, उत्तर प्रदेश की सियासत और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

शनिवार सुबह काशी के शंकराचार्य घाट पर वीर शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर गंगा पूजन कर संकल्प लेने के बाद महाराजश्री का काफिला रायबरेली पहुंचा। रास्ते भर जौनपुर, सुल्तानपुर और अमेठी के गौरीगंज में हजारों गौभक्तों ने पुष्पवर्षा कर पालकी का स्वागत किया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदः ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस देश में राम और कृष्ण की पूजा होती है, वहीं गौमाता की रक्षा के लिए ‘धर्मयुद्ध’ करना पड़ रहा है।


योगी सरकार को अल्टीमेटम: ’36 दिन बीते, अब सिर्फ 4 दिन शेष’

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदः ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के समय का स्मरण कराते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 36 दिन बीत चुके हैं और सरकार की चुप्पी उनकी ‘गौभक्त विरोधी’ मानसिकता को पुष्ट कर रही है। महाराजश्री ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध और गौमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित करने जैसे मुख्य कार्य (Task) सौंपे थे, लेकिन सत्ताधारी दल के नेताओं की खामोशियां अब संदेह पैदा कर रही हैं।

महाराजश्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब सारी अपेक्षाएं शेष 3 दिनों पर टिकी हैं। यदि 11 मार्च तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसकी समस्त नैतिक जिम्मेदारी योगी सरकार और सत्ताधारी दल की होगी। लखनऊ में होने वाली महापंचायत में देशभर के साधु-संत जुटेंगे, जहाँ इस आंदोलन की अगली और शायद सबसे कठोर दिशा तय की जाएगी।

काशी से रायबरेली तक भक्ति का सैलाब

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदः की यह यात्रा जहाँ-जहाँ से गुजरी, वहाँ का माहौल ‘गौमाता राष्ट्रमाता’ के नारों से गूंज उठा। बाबतपुर हाईवे पर आनंद प्रकाश जायसवाल और ऋषि यादव के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने स्वागत किया, तो वहीं जमदग्नि आश्रम जमेठा में महाराजश्री ने महर्षि जमदग्नि का पूजन किया। सीहीपुर चौराहा, बदलापुर हाईवे और ढकवा चौराहा पर भी भारी भीड़ उमड़ी।

अमेठी के गौरीगंज में तो नजारा देखते ही बनता था। को-ऑर्डिनेटर और गो-सांसद राकेश तिवारी के नेतृत्व में विद्वान आचार्यों ने मंगलाचरण किया और महिलाओं ने आरती उतारकर महाराजश्री का अभिनंदन किया। रायबरेली पहुँचने पर रानी झलकारी बाई चौराहा के पास यश पाण्डेय के निवास पर रात्रि विश्राम किया गया। यात्रा का हर पड़ाव लखनऊ कूच के लिए गौभक्तों की ताकत को दोगुना कर रहा है।

अहिंसक धर्मयुद्ध: शास्त्र और संवाद ही मुख्य हथियार

अपनी यात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदः ने कहा कि कुछ लोग ‘धर्मयुद्ध’ शब्द से भ्रमित हो सकते हैं, लेकिन हमारा मार्ग पूरी तरह अहिंसक है। उन्होंने कहा, “हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद है।” हम सत्ता को उसकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी याद दिलाने निकले हैं। यह एक वैचारिक युद्ध है जो तब तक थमेगा नहीं जब तक गौमाता को वह सम्मान नहीं मिल जाता जिसकी वह अधिकारी हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदः ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि सरकार के पास अभी भी समय है कि वह खुद को ‘असली हिंदू’ के रूप में स्थापित करे, अन्यथा जनता के बीच उनकी छवि गौ-विरोधियों जैसी हो जाएगी। 8 मार्च की सुबह महाराजश्री लालगंज और मदनखेड़ा होते हुए उन्नाव के लिए रवाना होंगे, जहाँ रात्रि विश्राम के बाद वह सीधे लखनऊ की सीमा में प्रवेश करेंगे।

लखनऊ में 11 मार्च को होगा महा-संग्राम

11 मार्च की तारीख उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाली है। लखनऊ में आयोजित होने वाली सभा में न केवल रणनीति तय होगी, बल्कि यह भी साफ हो जाएगा कि क्या योगी सरकार संतों की इस मांग के आगे झुकेगी या फिर यह आंदोलन एक बड़ा सियासी रूप लेगा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदः की अडिगता और उनके पीछे उमड़ता जनसैलाब यह बता रहा है कि इस बार ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ केवल प्रतीकात्मक नहीं रहने वाला है।

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