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संसद की सीढ़ियों पर ‘चाय-बिस्कुट’ विरोध पर रार: 204 पूर्व अफसरों और सैन्य अधिकारियों ने राहुल गांधी को लिखा ओपन लेटर, मांगी माफी

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में संसद की मर्यादा और विरोध के तरीकों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। 12 मार्च को संसद परिसर में एलपीजी (LPG) संकट के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के आचरण ने पूर्व नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों के एक बड़े समूह को नाराज कर दिया है। देश के 204 प्रबुद्ध नागरिकों, जिनमें रिटायर्ड IPS, IAS, पूर्व सैन्य अधिकारी और वकील शामिल हैं, ने राहुल गांधी को एक ‘ओपन लेटर’ लिखकर उनसे देश से माफी मांगने को कहा है।

“संसद लोकतंत्र का मंदिर, पिकनिक स्पॉट नहीं”: ओपन लेटर की बड़ी बातें

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद द्वारा जारी किए गए इस पत्र में 116 पूर्व सैन्य अधिकारियों, 84 पूर्व नौकरशाहों, चार पूर्व राजदूतों और चार वरिष्ठ वकीलों के हस्ताक्षर हैं। पत्र में राहुल गांधी के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शन को ‘संसदीय गरिमा के खिलाफ’ बताया गया है।

लेटर में उठाए गए मुख्य बिंदु:

  • नियमों का उल्लंघन: पत्र में याद दिलाया गया कि संसद परिसर में किसी भी प्रकार के धरने या प्रदर्शन पर रोक के संबंध में लोकसभा स्पीकर द्वारा पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

  • सीढ़ियों पर चाय-नाश्ता: पत्र में कहा गया कि राहुल गांधी का कुछ सांसदों के साथ संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्कुट लेते हुए विरोध करना बेहद आपत्तिजनक है।

  • मर्यादा का दायरा: लेटर के अनुसार, संसद की मर्यादा केवल सदन के भीतर तक सीमित नहीं है, बल्कि गलियारे, लॉबी और सीढ़ियां भी उसी पवित्र संस्था का हिस्सा हैं। वहां किया गया ऐसा आचरण लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को चोट पहुँचाता है।


अमित शाह का हमला: “दुनिया भर में खराब हो रही भारत की छवि”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। 15 मार्च को गुवाहाटी में एक सभा के दौरान शाह ने तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी कभी संसद के दरवाजे पर बैठकर चाय और पकौड़े खाते हैं। क्या उन्हें यह एहसास नहीं है कि नाश्ता करने के लिए कौन सी जगह उचित होती है? संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और वहां ऐसे आचरण से दुनिया भर में भारत की छवि खराब हो रही है।”

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शाह ने आगे कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर मर्यादाओं को ताक पर रखना परंपरा के खिलाफ है।


92 साल के देवगौड़ा ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी

विरोध की इस गूंज में पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी देवगौड़ा भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को दो पन्नों का पत्र लिखकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।

देवगौड़ा ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना लिखा कि संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार नारेबाजी, पोस्टर दिखाना और सीढ़ियों पर बैठकर जलपान के साथ प्रदर्शन करना संस्थान की गरिमा को कम करता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए नुकसानदेह बताया।


क्या था पूरा मामला?

दरअसल, 12 मार्च को देश में गहराते एलपीजी संकट को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की योजना बनाई थी। इस दौरान राहुल गांधी अन्य सांसदों के साथ संसद भवन की सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए। इसी धरने के दौरान चाय और बिस्कुट लेते हुए उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिसके बाद सत्ता पक्ष और पूर्व नौकरशाहों ने इसे ‘संसदीय गरिमा का अपमान’ करार दिया।

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