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22 साल पुराने हमले में बड़ा फैसला: विधायक अभय सिंह समेत 6 आरोपी बरी

वाराणसी। 22 साल पुराने हाई-प्रोफाइल हमले के मामले में MP-MLA Court Varanasi ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश Yajuvendra Vikram Singh ने साक्ष्यों के अभाव में गोसाईगंज (अयोध्या) के विधायक Abhay Singh, Vineet Singh समेत कुल 6 आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

यह मामला 4 अप्रैल 2002 की शाम का है, जब Dhananjay Singh अपने साथियों के साथ मऊ से लखनऊ जा रहे थे। आरोप था कि आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर नंदापुर गांव के पास उनके काफिले पर अत्याधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस हमले में धनंजय सिंह और उनके चार साथी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि उनके सुरक्षाकर्मी को भी गोली लगी थी।

घटना के बाद धनंजय सिंह ने अभय सिंह और उनके साथियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 11 गवाह पेश किए, लेकिन गवाहों के बयानों में विरोधाभास और ठोस साक्ष्यों की कमी के चलते अदालत ने आरोप सिद्ध नहीं माना।

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अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। इस मामले में अभय सिंह और विनीत सिंह के अलावा संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सत्येंद्र सिंह भी आरोपी थे, जिन्हें अदालत ने राहत दी है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुराने मामलों और आपराधिक मुकदमों को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। इस निर्णय के बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया, साक्ष्यों की भूमिका और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों पर सवाल और बहस तेज होने की संभावना है।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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