ऊटी से पीयूष गोयल का बड़ा हमला: ‘महिला-विरोधी, OBC-विरोधी’—INDI गठबंधन पर साधा निशाना, स्टालिन परिवार पर भी गंभीर आरोप

ऊटी (तमिलनाडु)। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पास न होने के बाद देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने तमिलनाडु के ऊटी से विपक्षी गठबंधन INDI पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस और डीएमके समेत पूरे गठबंधन को “महिला-विरोधी, OBC-विरोधी और तमिल गौरव-विरोधी” करार देते हुए कहा कि इस विधेयक का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को ठेस पहुंचाई है।

महिला आरक्षण पर सियासी टकराव तेज

पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी दिलाने के लिए संघर्ष किया, लेकिन विपक्ष के रवैये ने इस प्रयास को झटका दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन की नकारात्मक राजनीति के कारण महिलाओं को वह अधिकार नहीं मिल सका, जिसकी वे हकदार हैं। गोयल के अनुसार, “यह सिर्फ एक बिल नहीं था, बल्कि देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का प्रयास था, जिसे विपक्ष ने राजनीति के लिए रोक दिया।”

उन्होंने विशेष रूप से Dravida Munnetra Kazhagam, कांग्रेस और Trinamool Congress पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों का रवैया महिलाओं और पिछड़े वर्गों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की जनता अब इन पार्टियों की नीतियों को समझ चुकी है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगी।

स्टालिन परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप

अपने भाषण में गोयल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin और उनके परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि स्टालिन परिवार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ऊटी और नीलगिरी के लोगों के साथ “विश्वासघात” किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाय उद्योग संकट में है, किसानों को वादों के बावजूद राहत नहीं मिली और युवाओं को बिना रिश्वत दिए नौकरी नहीं मिलती।

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गोयल ने उपमुख्यमंत्री Udhayanidhi Stalin का नाम लेते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण विकास ठप हो गया है और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।

DMK का पलटवार: ‘काले कानून’ के खिलाफ जीत

वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन की जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि “परिसीमन नामक काले कानून” के खिलाफ संघर्ष संसद में सफल रहा है, क्योंकि यह विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। स्टालिन ने इसके लिए INDI गठबंधन के सांसदों और विशेष रूप से महिला नेताओं का आभार जताया।

स्टालिन का कहना है कि यह विधेयक राज्यों के अधिकारों और सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता था, इसलिए इसका विरोध जरूरी था। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया और कहा कि जनता के हित में यह फैसला लिया गया है।

तमिलनाडु चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को मतगणना होगी। ऐसे में यह मुद्दा चुनावी माहौल को और गर्म कर रहा है। भाजपा इस मुद्दे को महिला सशक्तिकरण और विकास के एजेंडे से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे की रक्षा से जोड़कर देख रहा है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। महिला आरक्षण, परिसीमन और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे विषय अब चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं।

जनता के सामने बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तमिलनाडु की जनता किस पक्ष की बात को ज्यादा महत्व देती है—महिला सशक्तिकरण के नाम पर पेश किए जा रहे बिल को या फिर सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के तर्क को। चुनावी नतीजे ही तय करेंगे कि जनता किस नैरेटिव को स्वीकार करती है।

फिलहाल इतना तय है कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तेज होने की संभावना है, क्योंकि चुनावी रण में हर बयान और हर आरोप-प्रत्यारोप का सीधा असर वोटरों के मन पर पड़ सकता है।

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