
Unnao, Uttar Pradesh – यूपी के औद्योगिक क्षेत्र में बसा Unnao का नाम आजकल मांस निर्यात के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा अंधेरा साम्राज्य चल रहा है जो टैक्स चोरी, अवैध पशु तस्करी, कैश ट्रांजेक्शन और कथित सरकारी संरक्षण की कहानी बयां करता है। Rustam Foods Pvt Ltd इस पूरे खेल का केंद्र बिंदु बना हुआ है। कंपनी के अंदरूनी सूत्रों और पिछले रिकॉर्ड्स के मुताबिक, जहां सरकारी दस्तावेजों में इसका टर्नओवर 1190 करोड़ के आसपास दिखाया जा रहा है, वहीं असल खेल 2500 करोड़ रुपये से ऊपर का है – और उसका ज्यादातर हिस्सा बिना बिलिंग के कैश में चल रहा है।
दिसंबर 2022 में इनकम टैक्स विभाग ने Rustam Foods और जुड़े ग्रुप पर छापा मारा था। 40 से ज्यादा ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला। Mohammad Salim/Qureshi ग्रुप की कंपनियों में dummy बैंक अकाउंट्स, bogus sales (Rustam ग्रुप में 535 करोड़ के फर्जी बिक्री के आरोप) और profit suppression के सबूत मिले। कुल 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा undisclosed income का पता चला। फ्लैट्स और विला सील किए गए। मीडिया ने इसे UP meat sector की सबसे बड़ी रेड बताया। लेकिन उसके बाद? शांति। कोई नई बड़ी कार्रवाई नहीं। सूत्र बताते हैं कि काम पुराने अंदाज में ही चल रहा है – बल्कि और तेज गति से।
अंदरूनी खुलासा: गेट पर रिसीविंग, कैश में पूरा खेल
Rustam Foods के अकाउंट सेक्शन के दो सूत्रों ने (नाम गोपनीय रखने की शर्त पर) जो जानकारी दी, वो हैरान करने वाली है। कंपनी के Unnao (Site-1, UPSIDC Industrial Area) प्लांट में बाहरी और अवैध सप्लाई सिर्फ गेट पर ही रिसीव होती है। अंदर क्या आ रहा है, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं। पशु ज्यादातर अवैध स्रोतों से आते हैं – जहां cow slaughter बैन है, वहां भी संदिग्ध सप्लाई रुकती नहीं। पूरा कारोबार कैश में सेटल होता है। बिलिंग नाम की कोई चीज नहीं।सूत्रों का कहना है, “2 साल के रिकॉर्ड देख लीजिए। असल टर्नओवर 2500 करोड़ के पार पहुंच चुका है। लीगल बिजनेस आधे से भी कम है। बाकी सब अंधेरे में।” 2022 की रेड के बाद भी सिस्टम नहीं बदला। बल्कि और मजबूत हो गया। अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी या राज्य स्तर का अफसर कार्रवाई करने की कोशिश करे, तो जिले से लेकर मंत्रियों तक “बराबर हिस्सा” पहुंचता है। यही कारण है कि रेड के बाद कंपनी फिर से फल-फूल रही है। FY 2025 में ऑफिशियल रेवेन्यू 1120 करोड़ के आसपास दर्ज है, लेकिन अंदरूनी अनुमान कहीं ज्यादा है।
Dahi Thana पर संरक्षण देने के कई सबूत आए सामने
स्थानीय पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। Unnao के Dahi Thana के पूर्व प्रभारी SHO Sanjeev Kushwaha (संजीव कुशवाहा) पर अवैध सप्लाई को संरक्षण देने के आरोप लगे थे। एक रिपोर्ट में यह साफ हुआ था कि वे Rustam Foods की गतिविधियों पर आंख मूंदे बैठे थे। बाद में किसी अन्य मामले में उनका ट्रांसफर सदर थाने में हो गया, लेकिन वर्तमान में वे औरास में तैनात हैं। और वर्तमान में ज्ञानेंद्र मिश्रा है लेकिन सिस्टम पुराना ही चल रहा है।
स्थानीय लोग और सूत्र बताते हैं कि थाना स्तर पर ऐसे “समझौते” आम हैं। अवैध पशु लाने वाले वाहन बिना चेकिंग के अंदर-बाहर होते रहते हैं। CCTV, वर्कर सेफ्टी, हाइजीन – सब पर सवाल। 2026 में भी Unnao के slaughter cluster में pollution, over-slaughtering और regulatory violations की शिकायतें आती रहती हैं। UP Pollution Control Board notices जारी करता है, लेकिन बड़े प्लेयर्स पर असर कम दिखता है।
2022 रेड की याद और उसके बाद की कहानी फिर भी नहीं बदली
2022 की रेड को याद कीजिए। IT टीम ने Unnao, Lucknow और Bareilly के ठिकानों पर छापेमारी की। Rustam Foods के अलावा Marya Frozen, Rehbar Food Industries आदि शामिल थे। Dummy accounts के जरिए करोड़ों की हेराफेरी, joint ventures में profit sharing छुपाना – सब सामने आया। Shakeel Qureshi जैसे पार्टनर्स के फ्लैट्स सील हुए। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे meat export sector का बड़ा घोटाला बताया गया।लेकिन 2023, 2024, 2025 – कोई नई बड़ी रेड नहीं। कंपनी की वेबसाइट अभी भी खुद को modern abattoir-cum-processing complex बताती है। 20+ देशों में export, halal buffalo meat। ऑफिशियल रेवेन्यू ग्रोथ 29% दिखाई दे रही है। लेकिन अंदरूनी सूत्र कहते हैं – असली ग्रोथ कैश में छिपी है। अवैध sourcing से सस्ता माल, कम खर्च, ज्यादा प्रॉफिट। टैक्स विभाग अगर दोबारा एक्शन ले, तो 2000 करोड़ से ऊपर का स्कैम सामने आ सकता है।
Unnao का मांस हब: विकास या अंधेरा?
Unnao Kanpur के पास leather-meat hub है। Yogi सरकार के समय illegal slaughter houses पर सख्ती हुई, कई यूनिट्स सील हुईं। लेकिन बड़े प्लेयर्स जैसे Rustam Foods operational रहे। 2024 में cow slaughter के वायरल वीडियो आए, Dahi थाना एरिया का जिक्र हुआ। पुलिस ने जांच की, लेकिन बड़े स्केल पर बदलाव नहीं दिखा।सूत्रों के मुताबिक, Bangladeshi nationals तक इन यूनिट्स में काम करते पकड़े गए। सिक्योरिटी कंसर्न बढ़े। फिर भी सिस्टम चल रहा है। मजदूर बिना दस्ताने-मास्क के काम करते हैं, वेस्ट मैनेजमेंट norms violate होते हैं, नदियों में प्रदूषण बढ़ता है। आम नागरिक पूछता है – क्या विकास सिर्फ कुछ लोगों के लिए है?सवाल उठते हैं…क्या 2022 की रेड सिर्फ दिखावा थी?
पुलिस-प्रशासन और मंत्री स्तर तक सबकी “हिस्सेदारी” सच है तो लोकतंत्र कहां खड़ा है?
अवैध पशु सप्लाई से न सिर्फ टैक्स चोरी, बल्कि कानून व्यवस्था और गौ-रक्षा नीति पर भी सवाल।
कैश इकोनॉमी कितने बड़े स्तर पर चल रही है?
Rustam Foods जैसे यूनिट्स रोज हजारों टन मांस export करते हैं। विदेशी मुद्रा आती है, रोजगार मिलता है। लेकिन अगर बैकएंड में अवैधता है, तो यह “विकास” नहीं, बल्कि लूट है।
Unnao का यह मामला सिर्फ एक कंपनी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का आईना है। जहां रेड होती है, खबरें आती हैं, फिर सब शांत। अंदरूनी सूत्र चेतावनी दे रहे हैं – अगली बड़ी रेड में 2000 करोड़ से ज्यादा का खेल सामने आ सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन, IT विभाग और यूपी सरकार इस पर क्या एक्शन लेती है। आम जनता को सच्चाई जानने का हक है। अगर कैश का यह अंधेरा जारी रहा, तो न सिर्फ सरकार की छवि, बल्कि कानून का राज भी कमजोर होगा।(यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड्स, 2022 IT raid रिपोर्ट्स और अंदरूनी सूत्रों पर आधारित है। सभी आरोप “कंपनी के सूत्रों द्वारा प्रमाणित” हैं। जांच एजेंसियां ही अंतिम सत्य निकाल सकती हैं। कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। यदि कंपनी या अधिकारी कोई स्पष्टीकरण दें, तो प्रकाशित किया जाएगा।)




