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व्हाट्सएप की ‘प्राइवेसी’ पर बड़ा सवाल: क्या चोरी-छिपे पढ़े जा रहे हैं आपके मैसेज? अमेरिकी जांच अचानक बंद होने से मचा हड़कंप

वॉशिंगटन/नई दिल्ली:
अगर आप यह सोचकर बेफिक्र हैं कि व्हाट्सएप पर आपके द्वारा भेजे गए मैसेज पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें आपके अलावा कोई नहीं देख सकता, तो यह खबर आपको चौंका सकती है। व्हाट्सएप के ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ के दावे को लेकर चल रही एक हाई-प्रोफाइल अमेरिकी जांच को अचानक बंद कर दिया गया है, जिससे प्राइवेसी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

जांच में हुआ था चौंकाने वाला दावा

अमेरिकी वाणिज्य विभाग (Commerce Department) के एक विशेष एजेंट पिछले 10 महीनों से ‘ऑपरेशन सोर्स्ड एन्क्रिप्शन’ के तहत एक गोपनीय जांच कर रहे थे। इस जांच की शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मेटा (व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी) के पास अपने यूजर्स के मैसेज, फोटो और वीडियो को अन-एन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में देखने की ‘असीमित क्षमता’ है। सरल शब्दों में कहें तो, जांच के मुताबिक कंपनी के पास वह ‘मास्टर चाबी’ है जिससे वह किसी की भी निजी बातचीत देख सकती है।

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व्हिसलब्लोअर ने खोली थी पोल

इस पूरे मामले की शुरुआत नवंबर 2024 में तब हुई जब एक व्हिसलब्लोअर ने गंभीर आरोप लगाए। जांच के दौरान कुछ पूर्व कॉन्ट्रैक्टर्स (Accenture के मॉडरेटर्स) ने भी स्वीकार किया कि उनके पास कथित तौर पर सुरक्षित चैट्स तक ‘अनलिमिटेड पहुंच’ थी। यह व्हाट्सएप के उस वादे के बिल्कुल उलट है जिसमें कहा जाता है कि मैसेज केवल भेजने और पाने वाला ही देख सकता है।

जांच बंद होने पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि जैसे ही जांच अधिकारी ने अपनी ये रिपोर्ट उच्च अधिकारियों और SEC (सिक्योरिटी एक्सचेंज कमीशन) को सौंपी, अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में इस जांच को अचानक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। विभाग ने दलील दी कि ये आरोप ‘पुख्ता नहीं’ हैं और यह अधिकारी के कार्यक्षेत्र से बाहर का मामला था।

मेटा का रुख: “यह सब काल्पनिक है”

दूसरी ओर, मेटा ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। कंपनी का कहना है कि उनकी तकनीक ऐसी है कि खुद मेटा भी मैसेज नहीं पढ़ सकता। कंपनी ने इस पूरी जांच को ‘मनगढ़ंत कहानियों’ पर आधारित बताया है।

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यूजर्स ने खोला मोर्चा

भले ही सरकारी जांच रुक गई हो, लेकिन जनता का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। भारत, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के यूजर्स ने मिलकर मेटा के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा (Class-action Lawsuit) दर्ज कराया है। भारत जैसे बड़े बाजार के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि यहाँ करोड़ों लोग व्हाट्सएप पर अपनी निजी और प्रोफेशनल जानकारी साझा करते हैं।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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