लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने गोमती नगर विस्तार क्षेत्र में एलडीए की अर्जित भूमि से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। प्राधिकरण की जांच में एक रियल एस्टेट कंपनी के नाम पर कथित रूप से फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। इसके बाद एलडीए की ओर से सुशांत गोल्फ सिटी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एलडीए के अनुसार, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान पता चला कि गोमती नगर विस्तार के ग्राम अरदौनामऊ की भूमि से संबंधित एक कथित एनओसी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में दस्तावेज पर एलडीए के सहायक चकबंदी अधिकारी (अर्जन) के नाम, हस्ताक्षर और कार्यालय की मुहर फर्जी पाई गई।
एलडीए के सहायक चकबंदी अधिकारी तुलसीराम ने बताया कि संबंधित दस्तावेज प्राधिकरण की ओर से कभी जारी नहीं किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कथित फर्जी एनओसी का उपयोग ग्राम अरदौनामऊ स्थित भूमि पर विकास कार्य कराने के उद्देश्य से किया गया। प्राधिकरण का आरोप है कि दस्तावेज में गलत तथ्यों का उल्लेख कर उसे वास्तविक दर्शाने का प्रयास किया गया।
एलडीए के अनुसार, ग्राम अरदौनामऊ की संबंधित भूमि का अधिग्रहण वर्ष 2001 में अमर शहीद पथ गोमती नगर विस्तार योजना के तहत किया जा चुका है। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण में निहित है। ऐसे में किसी निजी संस्था द्वारा इस भूमि के संबंध में एनओसी जारी कराना या उसका उपयोग करना नियमों के विपरीत है।
मामले में एलडीए के नायब तहसीलदार की ओर से सुशांत गोल्फ सिटी थाने में संबंधित रियल एस्टेट कंपनी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और दस्तावेज तैयार करने तथा उसके उपयोग में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूमि की खरीद से पहले उसके दस्तावेजों की प्राधिकरण से जांच अवश्य करा लें। उन्होंने बताया कि वेलनेस सिटी और आईटी सिटी जैसी योजनाओं के तहत कई गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में है। ऐसे क्षेत्रों में जमीन खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।





