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महाशिवरात्रि 2026: सोमनाथ में विशेष ‘महापार्थिवेश्वर पूजन’, समुद्र तट पर होगा दिव्य आयोजन

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सोमनाथ में इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है। Shri Somnath Trust की ओर से भक्तों को एक अद्भुत और दुर्लभ पूजा—महापार्थिवेश्वर पूजन—में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है।


समुद्र तट पर शास्त्रोक्त विधि से होगा पूजन
यह विशेष पूजन सोमनाथ के पवित्र समुद्र तट मारुति बीच पर संपन्न होगा। समुद्र की लहरों के बीच, खुले आकाश के नीचे और पंचमहाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—की साक्षी में यह अनुष्ठान शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ कराया जाएगा। भक्त स्वयं मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर उसका पूजन करेंगे।


क्या है पार्थिव शिवलिंग पूजन का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिट्टी से बने शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। इसका पूजन भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि पार्थिव शिवलिंग पूजन से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और साधक को आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।


केवल पूजा नहीं, प्रकृति से जुड़ने का अवसर
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि प्रकृति और परमात्मा से जुड़ने का एक अनोखा अनुभव भी है। समुद्र, मिट्टी, अग्नि और मंत्रोच्चार के बीच किया जाने वाला यह पूजन भक्तों को आत्मिक शांति और गहन साधना का अवसर प्रदान करता है।


देश-विदेश से लोगों के आने की उम्मीद
हर साल महाशिवरात्रि पर सोमनाथ में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस विशेष पूजन के कारण इस बार देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।


सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का संदेश
सोमनाथ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का प्रतीक रहा है। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से न केवल आस्था को बल मिलता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से जोड़ने का संदेश भी दिया जाता है।


महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर सोमनाथ में होने वाला महापार्थिवेश्वर पूजन श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अनुभव साबित हो सकता है।

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