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नये बिजली विधेयक और चार लेबर कोड के खिलाफ 16 जनवरी को देशव्यापी किसान-श्रमिक आंदोलन

लखनऊ। नये बिजली विधेयक 2025, चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड), बीज बिल और श्रमिक-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 16 जनवरी को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय अपील पर आयोजित इस अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस में किसानों के साथ-साथ श्रमिक संगठन और बिजली कर्मचारी संगठन भी सड़कों पर उतरेंगे।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यह प्रदर्शन परिवर्तन चौक पर सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों के शामिल होने की संभावना है।

बिजली निजीकरण और लेबर कोड के खिलाफ एकजुटता

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों का कहना है कि नया बिजली विधेयक बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देता है, जिससे किसानों, गरीब उपभोक्ताओं और मजदूर वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। वहीं चारों लेबर कोड श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और रोजगार सुरक्षा को खतरे में डालते हैं।

प्रदर्शन में किसान सभा, किसान महासभा, क्रांतिकारी किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन, भाकियू श्रमिक जनशक्ति यूनियन सहित कई किसान संगठन भाग लेंगे। इनके अलावा सीटू, इंटक, एटक जैसे केंद्रीय ट्रेड यूनियन और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति भी आंदोलन को समर्थन दे रही हैं।

मुख्य मांगें क्या हैं?

प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार से निम्न प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी—

  • नया बिजली विधेयक 2025 वापस लिया जाए

  • बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया रोकी जाए

  • चारों लेबर कोड निरस्त किए जाएं

  • नया बीज बिल वापस लिया जाए

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी मिले

  • किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए

गांव-गांव चल रहा प्रचार अभियान

प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए किसान संगठनों द्वारा गांव-गांव संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष रामरतन यादव, जिलाध्यक्ष एकादशी यादव, मंडल प्रभारी दिनेश कुमार रावत और जिला उपाध्यक्ष विशंभर दयाल के नेतृत्व में चिनहट, बीकेटी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सघन प्रचार किया जा रहा है।

आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन

आयोजकों का कहना है कि बिजली कर्मचारियों द्वारा पिछले 414 दिनों से जारी आंदोलन को अब देशभर के किसान और श्रमिक संगठनों का खुला समर्थन मिल रहा है। आने वाले दिनों में यह साझा संघर्ष और तेज होगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने जनता से अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर किसान-श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।

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