Homeराज्यउत्तर प्रदेशबिजली के निजीकरण के खिलाफ किसान-कर्मचारी एकजुट, 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल...

बिजली के निजीकरण के खिलाफ किसान-कर्मचारी एकजुट, 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान

लखनऊ।
बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ उत्तर प्रदेश में विरोध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर गुरुवार को प्रदेश भर में बिजली कर्मियों ने किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला और प्रस्तावित संशोधन बिल वापस नहीं लिया तो 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी।

राजधानी लखनऊ में परिवर्तन चौक स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के पास संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिरोध दिवस के मौके पर बड़ा धरना-प्रदर्शन हुआ। इसमें विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारी भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसान संगठनों और बिजली कर्मियों ने एक स्वर में निजीकरण को जनविरोधी बताते हुए सरकार से तत्काल फैसला वापस लेने की मांग की।

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ किसान और बिजली कर्मी मिलकर संयुक्त संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों की नहीं, बल्कि देश के किसानों और आम उपभोक्ताओं के भविष्य की है।

शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन बिल के जरिए सब्सिडी और क्रॉस सब्सिडी खत्म करने की तैयारी है। क्रॉस सब्सिडी समाप्त होने से जहां उद्योगों और बड़े पूंजीपतियों को लाभ होगा, वहीं किसानों और गरीब उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कई गुना बढ़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे खेती की लागत बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि संशोधन बिल में कॉस्ट रिफ्लेक्टिव टैरिफ लागू करने की बात की जा रही है। उत्तर प्रदेश में बिजली की लागत लगभग 8.18 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि निजी कंपनियां कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेंगी। ऐसे में बिजली की दर 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है। साढ़े सात हॉर्स पावर का पंप सेट चलाने वाले किसान को हर महीने 10 से 12 हजार रुपये तक का बिजली बिल देना पड़ेगा। उन्होंने इसे गरीबों और किसानों को “लालटेन युग” में धकेलने वाला फैसला बताया।

प्रदर्शन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बिजली के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और बीज संशोधन बिल को वापस लेने की मांग को लेकर सरकार को ज्ञापन सौंपा गया।

धरना-प्रदर्शन में क्रांतिकारी किसान यूनियन लखनऊ के जिला अध्यक्ष एकादशी यादव, राम रतन यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष विशंभर दयाल, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष दिनेश कुमार रावत, जिला प्रभारी मोहम्मद हफीज, जिला उपाध्यक्ष जगदीश कुमार, ग्राम अध्यक्ष ब्रह्मा देवी, महिला तहसील अध्यक्ष काशीराम गौतम, राम प्रकाश पाल, विवेक गौतम सहित सैकड़ों किसान और मजदूर शामिल हुए। संघर्ष समिति की ओर से जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.के. दीक्षित, के.एस. रावत, सरजू त्रिवेदी और ए.के. मिश्र भी मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को गुरुवार को 415 दिन पूरे हो गए। इस मौके पर प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि जब तक सरकार निजीकरण और संशोधन बिल वापस नहीं लेती, तब तक संघर्ष और तेज किया जाएगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular