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CM योगी एक्शन मोड में: 44,994 सरकारी कर्मचारियों का रुकेगा वेतन, यूपी में क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शासन की कार्यप्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को लागू कर रखा है। सूबे की सत्ता पर काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 अक्टूबर 2017 को प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली शुरू की थी।

इसके बाद विभागों में इसके माध्यम से फाइलों के निपटान की व्यवस्था अनिवार्य हुई। इसके लिए सीएम कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय, सचिवालय के 93 विभागों को इस प्रणाली से जोड़ गया।

सभी विभागों को पेपरलेस करने की सोच के तहत लागू की गई इस व्यवस्था का लखनऊ में तमाम सरकारी विभाग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। हाल में सीएम को पता चला कि 21 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच विभागों के 58% अफसरों-कर्मचारियों ने ई-ऑफिस लॉग-इन का उपयोग नहीं किया है।

ई-ऑफिस लॉग-इन का नहीं किया गया इस्तेमाल

सीएम योगी विभागीय कर्मियों के इस रवैये से नाराज हुए। उन्होंने इस सिस्टम की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश दिए। योगी के इस निर्देश के बाद विभागों में कार्यरत 44994 अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन अटकने के आसार हैं। इन्होंने ई-ऑफिस लॉग-इन का इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं किया है। मुख्यमंत्री योगी के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त और डीएम को पत्र लिखकर कहा कि ई-ऑफिस पर काम न करने वाले 44994 अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनवरी में ई-ऑफिस का इस्तेमाल नहीं किया तो उन्हें वेतन न दिया जाए।

विभागों में मचा हड़कंप

पत्र में लिखा है कि ई-ऑफिस पर काम करने के बाद कर्मचारियों को वेतन दिया जाए। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के इस पत्र को लेकर सभी सरकारी विभागों में हड़कंप मचा है। इसकी वजह है उक्त पत्र में लिखा ये निर्देश कि ई-ऑफिस पर पूरे महीने काम न करने वाले कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है तो संबंधित कार्यालयाध्यक्ष-आहरण-वितरण अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। पत्र में लिए गए इस निर्देश के कारण ये कहा जा रहा कि अब सरकारी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली की अनदेखी नहीं होगी। साल के अंत तक मुख्यमंत्री की यह व्यवस्था सभी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर पर बने सरकारी कार्यालयों में सफल होगी।

कैसे हुई सीएम को जानकारी?

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के अनुसार, ई-ऑफिस व्यवस्था प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू है। इसके बाद भी तमाम अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस पर फाइलों का निस्तारण नहीं कर रहे हैं। बीते दिनों मुख्यमंत्री को पता चला कि साल 21 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के मामले में ऊर्जा विभाग, धर्मार्थ कार्य विभाग, कारागार सुधार विभाग, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा विभाग सबसे पीछे हैं। ऊर्जा विभाग में ई-ऑफिस के 75 यूजर हैं। इनमें से एक भी यूजर ने एक माह तक ई-ऑफिस लॉग-इन नहीं किया। पीडब्ल्यूडी विभाग यहां 10,895 यूजर हैं, लेकिन इस विभाग में 6080 यूजर ने एक माह तक ई-ऑफिस को लॉग-इन नहीं किया।

एनआईसी ने तैयार की रिपोर्ट

सिंचाई विभाग के 4905, कृषि विभाग के 4621, राजस्व विभाग के 3784, ग्राम्य विकास विभाग के 2619, आवास विभाग के 1618, चिकित्सा विभाग के 1435, बेसिक शिक्षा विभाग के 1161, माध्यमिक शिक्षा विभाग के 1031 यूजर ने एक माह से ई-ऑफिस को लॉग-इन नहीं किया। सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा ई-ऑफिस को लॉग-इन न करने की रिपोर्ट एनआईसी ने तैयार कर सीएम योगी को सौंपी। इस रिपोर्ट को देख योगी खफा हुए। उन्होंने ई-ऑफिस प्रणाली की अनदेखी करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लेने का निर्देश दिया, जिससे इस सिस्टम की अनदेखी करने की हिम्मत कोई न करे।

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