गैस सिलेंडर पर ‘डबल अटैक’: कीमतें 60 रुपये बढ़ीं, अब बुकिंग के लिए भी करना होगा 21 दिन का इंतजार

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारतीय रसोई तक पहुँच गया है। तेल कंपनियों ने घरेलू और व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं को एक साथ दो बड़े झटके दिए हैं। एक तरफ जहां घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल आया है, वहीं दूसरी तरफ सिलेंडर की ‘पैनिक बुकिंग’ रोकने के लिए नए कड़े नियम लागू कर दिए गए हैं।
देशभर के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है, क्योंकि अब न केवल सिलेंडर के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर भी आप 21 से 25 दिनों से पहले दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर सकेंगे। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी और सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए ये बदलाव अनिवार्य हो गए थे।
गैस की कीमतों में लगी आग: जेब पर पड़ा सीधा बोझ
7 मार्च 2026 से लागू हुई नई दरों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की सीधी बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपये तक पहुँच गई है। कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में तो यह आंकड़ा 930 रुपये के पार जा चुका है।
महंगाई का यह वार केवल घरों तक सीमित नहीं है। होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडर के दाम में भी 115 रुपये की भारी वृद्धि हुई है। पिछले एक साल में यह दूसरी बार है जब एलपीजी की कीमतों ने आम जनता का बजट बिगाड़ा है। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी कीमतों में 50 रुपये का इजाफा किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका खामियाजा अब भारतीय उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
नया बुकिंग नियम: 21 दिन का ‘लॉक-इन’ पीरियड
कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ जो दूसरा बड़ा बदलाव हुआ है, वह है बुकिंग की समय-सीमा। तेल कंपनियों (IOC, BPCL और HPCL) ने अब घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए 21 दिनों का अनिवार्य अंतराल (Lock-in Period) लागू कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपने आज एक सिलेंडर डिलीवर करवाया है, तो आप अगला सिलेंडर कम से कम 21 दिनों के बाद ही बुक कर पाएंगे।
यह नियम इसलिए लागू किया गया है क्योंकि युद्ध की खबरों के बीच लोगों ने पैनिक होकर एडवांस बुकिंग शुरू कर दी थी। कई इलाकों में बुकिंग का ग्राफ 20% तक बढ़ गया था, जिससे सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ रहा था। सरकार और कंपनियों का मानना है कि इस प्रतिबंध से होर्डिंग (जमाखोरी) रुकेगी और उन लोगों को समय पर सिलेंडर मिल पाएगा जिन्हें वाकई इसकी जरूरत है।
पश्चिम एशिया तनाव और सप्लाई का संकट
इस ‘डबल झटके’ के पीछे की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों से गैस और तेल की आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग दो-तिहाई एलपीजी आयात करता है और इसका 85-90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
तेल कंपनियों का कहना है कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वासन दिया है कि देश में ऊर्जा का पर्याप्त भंडार है और पैनिक होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 87 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से कंपनियों के लिए पुरानी दरों पर सप्लाई जारी रखना मुश्किल हो गया था।
आम आदमी की रसोई और बढ़ते खर्च
महंगाई की इस मार ने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां सब्जियां और दालें पहले से ही महंगी हैं, वहीं गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें ‘कोढ़ में खाज’ का काम कर रही हैं। गृहणियों का कहना है कि 21 दिन की पाबंदी उन परिवारों के लिए मुसीबत बनेगी जहां सदस्य ज्यादा हैं और सिलेंडर 15-18 दिनों में ही खत्म हो जाता है।
वहीं, कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से बाहर खाना भी महंगा होने की पूरी संभावना है। छोटे ढाबे और रेस्टोरेंट संचालक अब अपनी थाली के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिल रही 300 रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी, जिससे गरीब परिवारों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।
क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?
आने वाले दिनों में गैस सिलेंडर की स्थिति पूरी तरह से वैश्विक हालातों पर निर्भर करेगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता है, तो तेल और गैस की कीमतों में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार फिलहाल वैकल्पिक देशों जैसे रूस और अमेरिका से आयात बढ़ाकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल, उपभोक्ताओं के लिए यही सलाह है कि वे घबराकर एक्स्ट्रा बुकिंग न करें और गैस का उपयोग सावधानी से करें। 21 दिन के इस नए नियम को समझने और इसके अनुसार अपना स्टॉक मैनेज करने में ही समझदारी है। तेल कंपनियों ने साफ कर दिया है कि यह कदम केवल बाजार को संतुलित करने के लिए उठाया गया है और स्टॉक की कोई वास्तविक कमी नहीं है।






