रिपोर्ट: डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी
सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘वर्चस्व’ की लड़ाई अक्सर अपनों को ही आमने-सामने खड़ा कर देती है। सुल्तानपुर के अखंडनगर इलाके में एक यादव परिवार के जमीनी विवाद ने अब पूर्वांचल की बीजेपी राजनीति में भूचाल ला दिया है। कभी योगी सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री (अध्यक्ष, राज्य बीज विकास निगम) रहे राणा अजीत प्रताप सिंह आज सलाखों के पीछे हैं। उनकी गिरफ्तारी ने न केवल पुलिस महकमे में गाज गिराई है, बल्कि बीजेपी के भीतर चल रही ‘अंतर्कलह’ को भी चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
क्या था मामला? यादव परिवार का झगड़ा और राणा की ‘एंट्री’
पूरा विवाद अखंडनगर के कल्याणपुर गांव का है। यहाँ एक यादव परिवार में चचेरे भाइयों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से रंजिश चल रही है। विवाद में मोड़ तब आया जब एक पक्ष का युवक, जो पूर्व मंत्री राणा अजीत का चालक बताया जाता है, अपने मालिक की शरण में पहुंचा। वहीं, दूसरे पक्ष को स्थानीय सदर विधायक राज प्रसाद ‘राजबाबू’ उपाध्याय का संरक्षण प्राप्त होने की चर्चा है।
सुलतानपुर के कल्याणपुर कांड में पूर्व मंत्री सहित आठ गिरफ्तार, शांति व्यवस्था के मद्देनजर गांव में पुलिस बल तैनात#GoondaRajl #SultanpurAttack #SBSPGoons #HeartAndCraftOfIndia pic.twitter.com/vfY8uemxsf
— Nipun Bharat Samachar (@NipunBharatNews) March 16, 2026
रविवार सुबह करीब 9 बजे मामला तब खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया, जब आरोप के मुताबिक लाठी-डंडों और असलहों से लैस बाहरी लोग कब्जे की नीयत से दूसरे पक्ष पर टूट पड़े। इस दौरान हुई फायरिंग और मारपीट में कमलेश यादव और विपुल यादव समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए। दो घायलों की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर करना पड़ा।
एसपी चारु निगम का ‘रौद्र रूप’: थानेदार सस्पेंड, सीओ पर जांच
वारदात की खबर मिलते ही सुल्तानपुर की पुलिस अधीक्षक (SP) चारु निगम मौके पर जा धमकीं। पुलिस के ढुलमुल रवैये और मामले को हल्के में लेने पर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
एक्शन: लापरवाही बरतने और उच्चाधिकारियों को गलत सूचना देने के आरोप में एसएचओ संत कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
सीओ पर गाज: क्षेत्र के सीओ विनय गौतम के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
गिरफ्तारी: पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर पूर्व मंत्री राणा अजीत प्रताप सिंह, उनके पुत्र अभिजीत और भतीजे सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को कोर्ट में पेशी के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।
बीजेपी में ‘रार’: एमएलसी बनाम विधायक
इस गिरफ्तारी ने बीजेपी के भीतर एक बड़ी दरार पैदा कर दी है। गोरखपुर-अयोध्या स्नातक क्षेत्र के आक्रामक एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह खुलकर राणा अजीत के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने राणा को ‘क्लीन चिट’ देते हुए सारा ठीकरा सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय के सिर पर फोड़ दिया है।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप ने आरोप लगाया कि:
“राजबाबू उपाध्याय क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए राणा अजीत को जबरन फर्जी मामलों में फंसा रहे हैं। यह सत्ता और रसूख का दुरुपयोग है।”
बता दें कि राजबाबू उपाध्याय निषाद पार्टी के कोटे से बीजेपी के सिंबल पर चुनाव जीते थे। एमएलसी के इन गंभीर आरोपों ने जिले की राजनीति में सनसनी फैला दी है।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी शिकंजा
एसपी चारु निगम ने साफ कर दिया है कि कानून हाथ में लेने वाला कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के लाइसेंसी असलहे जब्त कर लिए हैं और उनके शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। आरोपियों को कोर्ट से सप्ताह भर की रिमांड पर जेल भेजा गया है।
