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उन्नाव: गंगाघाट स्टेशन के कायाकल्प की राह साफ, रेलवे भूमि से हटेंगे अवैध निर्माण

रिपोर्ट: संतोष अवस्थी, ब्यूरो उन्नाव
उन्नाव।
शुक्लागंज क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बने अवैध निर्माणों के खिलाफ उत्तर रेलवे ने सख्त रुख अपनाया है। गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत चल रहे नव निर्माण और पुनर्विकास कार्य को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने अवैध रूप से बने मकानों और भवनों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस संबंध में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सीनियर सेक्शन इंजीनियर/कार्य शिव कुमार गुप्ता की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। आदेश के बाद रेलवे के संबंधित कर्मचारियों ने पश्चिमी चौकी, पुराने गंगापुल के पास रेलवे भूमि पर बने भवनों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि ये सभी निर्माण रेलवे की भूमि पर अवैध रूप से किए गए हैं और इन्हें हटाना अनिवार्य है।

रेलवे प्रशासन ने भवन स्वामियों और कब्जाधारियों को 15 जनवरी 2026 तक स्वयं अपने स्तर से अवैध निर्माण हटाने का समय दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा तक निर्माण नहीं हटाए गए तो 16 जनवरी 2026 को रेलवे प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर देगा। इस दौरान होने वाले खर्च की जिम्मेदारी भी संबंधित कब्जाधारियों पर डाली जा सकती है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अमृत भारत योजना के तहत गंगाघाट रेलवे स्टेशन का व्यापक कायाकल्प किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत स्टेशन परिसर का विस्तार, यात्री सुविधाओं का विकास, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना है। अवैध निर्माण न सिर्फ विकास कार्यों में बाधा बन रहे हैं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।

नोटिस चस्पा होने के बाद शुक्लागंज और आसपास के इलाकों में हलचल तेज हो गई है। कुछ लोगों ने अपने स्तर से निर्माण हटाने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि कई परिवारों में इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बने मकानों को हटाना उनके लिए बेहद कठिन है, लेकिन रेलवे प्रशासन के सख्त आदेश के बाद उनके पास सीमित विकल्प ही बचे हैं।

रेलवे प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे रेलवे की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें। अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों को समय पर पूरा करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई जरूरी है और भविष्य में भी रेलवे भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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