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महा-खुलासा: उन्नाव पुलिस की ‘गश्ती’ या वसूली का ‘शॉर्टकट’? ललऊ खेड़ा चौकी के सिपाहियों का काला खेल कैमरे में कैद!

उन्नाव (विशेष रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पुलिस को ‘मित्र पुलिस’ बनाने और अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का संकल्प दिया है, लेकिन उन्नाव जनपद की ललऊ खेड़ा चौकी से जो तस्वीरें और तथ्य सामने आ रहे हैं, वे खाकी के इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। ‘निपुण भारत समाचार’ की टीम ने एक ऐसी सच्चाई का पता लगाया है, जिसने पुलिस महकमे के उन दावों की पोल खोल दी है जिनमें रात की गश्त को सुरक्षा का पर्याय बताया जाता है।

कैमरे की नजर से: रात का सन्नाटा और ‘वसूली’ का शोर

विश्वस्त सूत्रों के हवाले से ‘निपुण भारत समाचार’ को कुछ ऐसे डिजिटल साक्ष्य (फोटो और वीडियो क्लिप्स) प्राप्त हुए हैं, जो ललऊ खेड़ा चौकी में तैनात दो सिपाहियों की कार्यशैली को संदिग्ध बना रहे हैं। इन दृश्यों में साफ देखा जा सकता है कि रात के अंधेरे में बाइक से गश्त कर रहे ये सिपाही आम जनता की सुरक्षा के बजाय ‘विशिष्ट’ वाहनों की ताक में रहते हैं।
सूत्रों का दावा है कि ये सिपाही विशेष रूप से उन रास्तों पर सक्रिय रहते हैं जहाँ से गोवंश और मवेशियों की तस्करी की आशंका रहती है। वीडियो क्लिप्स में इन सिपाहियों को संदिग्ध वाहन चालकों के साथ ‘सीधी बातचीत’ करते देखा गया है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।

सवालों के घेरे में खाकी: तस्करी को ‘अभय दान’ कौन दे रहा?

हैरत की बात यह है कि यह खेल पिछले कई महीनों से अनवरत जारी है। सवाल यह उठता है कि क्या इन सिपाहियों को कानून का डर नहीं है, या फिर इनके हौसले किसी ‘अदृश्य’ संरक्षण के कारण बुलंद हैं?
क्या गश्त के नाम पर गोवंश तस्करों को ‘सेफ पैसेज’ दिया जा रहा है?
क्या उच्चाधिकारियों को इस बात की भनक नहीं है कि रात के अंधेरे में सड़कों पर ‘वसूली की रसीद’ कट रही है?
जिन तस्वीरों में सिपाही संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त दिख रहे हैं, उन पर विभाग अब तक मौन क्यों है?

निपुण भारत समाचार’ की प्रतिबद्धता

एक जिम्मेदार न्यूज़ चैनल होने के नाते, हमारा उद्देश्य किसी की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद उन ‘काली भेड़ों’ को उजागर करना है जो पूरी फोर्स को बदनाम करती हैं। हमारे पास मौजूद साक्ष्य इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ललऊ खेड़ा चौकी के कुछ कर्मचारी अपने कर्तव्य पथ से भटक कर ‘वसूली पथ’ पर निकल पड़े हैं।

अब क्या करेंगे ‘कप्तान’?

यह खबर केवल एक सूचना नहीं, बल्कि उन्नाव पुलिस प्रशासन के लिए एक दर्पण है। जब साक्ष्य (Digital Evidence) सार्वजनिक होंगे, तो विभाग के पास बचाव का कोई रास्ता नहीं बचेगा। अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक उन्नाव इन ‘वसूलीबाज’ सिपाहियों पर विभागीय हंटर चलाते हैं या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


‘निपुण भारत समाचार’ बहुत जल्द उन तमाम तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स के साथ इस ‘वसूली कांड’ की हर परत को बेनकाब करेगा। सच्चाई से पर्दा उठना अब तय है।


डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सूत्रों से प्राप्त साक्ष्यों और स्थानीय फीडबैक पर आधारित है। हमारा संस्थान किसी भी व्यक्ति पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करता, बल्कि लोकहित में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है।

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