बिजली निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का फैसला आज, कोलकाता में AIPF की आम सभा


लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर आज बड़ा फैसला होने जा रहा है। ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन की आम सभा (फेडरल काउंसिल) शनिवार 18 जनवरी को कोलकाता में आयोजित हो रही है, जिसमें बिजली के निजीकरण और प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव ने बताया कि बैठक में उत्तर प्रदेश में चल रही बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया और केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए दिए जा रहे वित्तीय पैकेज जैसे दबावपूर्ण कदमों पर विशेष चर्चा होगी। इसके साथ ही देशव्यापी आंदोलन के कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल को अब तक लोकसभा में पांच बार पेश किए जाने के बावजूद बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों के विरोध के चलते केंद्र सरकार पारित नहीं करा सकी है। अब केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स के माध्यम से विभिन्न राज्यों में निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
फेडरेशन के अनुसार, ट्रांसमिशन सेक्टर में टैरिफ बेस्ड कम्पटीटिव बिडिंग के नाम पर नए बनने वाले पारेषण विद्युत उपकेंद्रों को राज्य क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है। वहीं उत्पादन क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निजी घरानों को बिजली परियोजनाएं सौंपी जा रही हैं। सरकारी क्षेत्र की ताप विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के नाम पर राज्य क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है। कुल मिलाकर वितरण, पारेषण और उत्पादन—तीनों क्षेत्रों में निजीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
कोलकाता में होने वाली फेडरल काउंसिल की बैठक में लगभग 21 राज्यों के विद्युत अभियंता संघों के पदाधिकारी भाग लेंगे। इसमें निजीकरण के विरोध में आगे की संघर्ष रणनीति, आंदोलन की रूपरेखा और समयबद्ध कार्यक्रमों पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।
इस बीच उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में आंदोलन लगातार 416वें दिन भी जारी रहा। प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा समेत कई स्थानों पर विरोध सभाएं आयोजित की गईं।
बिजली अभियंताओं का कहना है कि निजीकरण से न केवल बिजली महंगी होगी, बल्कि किसानों, गरीब उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों पर भी गंभीर असर पड़ेगा। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।





