Media War: लाइव डिबेट में रुबिका लियाकत को सतीश के सिंह ने कहा ‘चीयरलीडर’, भड़कीं एंकर, व्यापार समझौता छोड़ ‘इज्जत’ पर छिड़ी जंग

नई दिल्ली | भारतीय न्यूज़ चैनलों की डिबेट्स में अक्सर तीखी नोकझोंक देखने को मिलती है, लेकिन शनिवार रात एक जाने-माने न्यूज़ चैनल पर जो हुआ, उसने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। मशहूर न्यूज़ एंकर रुबिका लियाकत (Rubika Liyaquat) और वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह (Satish K Singh) के बीच लाइव शो के दौरान ऐसी भिड़ंत हुई कि डिबेट का मुद्दा ‘व्यापार समझौता’ (Trade Deal) कहीं पीछे छूट गया और पूरी बहस ‘निजी हमले’ और ‘इगो’ पर आकर टिक गई।
क्या था पूरा मामला? (The ‘Cheerleader’ Comment)
बहस भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) पर हो रही थी। रुबिका लियाकत इस डील के फायदों पर चर्चा कर रही थीं। तभी पैनल में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह ने सरकार की आलोचना करते हुए तर्क रखा कि इस डील को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साह दिखाया जा रहा है।
सतीश के सिंह ने तीखे लहजे में कहा— “कुछ लोग इस डील पर चीयरलीडर की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”
“आपने चीयरलीडर किसे कहा?”: लाइव शो में बढ़ा तनाव
सतीश के सिंह की यह लाइन सुनते ही रुबिका लियाकत का पारा चढ़ गया। उन्हें लगा कि यह टिप्पणी सीधे उन पर और उनकी पत्रकारिता पर की गई है। रुबिका ने फौरन टोकते हुए पूछा— “सतीश जी, आपने चीयरलीडर किसे कहा?”
सतीश के सिंह ने बिना किसी झिझक या भूमिका के सीधा जवाब दिया— “आप जैसे लोगों को ही कहा है।”
[Image: Split screen showing Rubika Liyaquat looking angry and Satish K Singh speaking calmly]
बहस पीछे छूटी, ईगो हुआ लाइव
सतीश के सिंह के इस बेबाक और कड़े जवाब के बाद डिबेट का माहौल पूरी तरह बदल गया। रुबिका लियाकत इस टिप्पणी से काफी आहत और गुस्से में नजर आईं। सोशल मीडिया पर डॉ. शीतल यादव जैसे कई यूजर्स ने दावा किया कि “रुबिका लगभग रोने ही वाली थीं” क्योंकि एक लाइव नेशनल टीवी पर वरिष्ठ पत्रकार द्वारा उन्हें ‘चीयरलीडर’ (जो केवल उत्साह बढ़ाने का काम करता है, विश्लेषण का नहीं) कहना उनके प्रोफेशनल करियर पर एक बड़ा कटाक्ष था।
अगले 10 मिनट तक बहस इस पर नहीं हुई कि व्यापार समझौते से देश को क्या फायदा होगा, बल्कि इस पर हुई कि:
क्या एक एंकर को ‘चीयरलीडर’ कहना पत्रकारिता की मर्यादा के खिलाफ है?
क्या यह एक विश्लेषण है या सीधे तौर पर दी गई कोई गाली?
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस घटना का वीडियो वायरल होते ही ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं।
सतीश के सिंह के समर्थक: उनका कहना है कि आज की पत्रकारिता में एंकर्स अक्सर प्रवक्ताओं की तरह व्यवहार करते हैं, इसलिए ‘चीयरलीडर’ शब्द एक सटीक विश्लेषण है।
रुबिका लियाकत के समर्थक: उनका तर्क है कि किसी महिला एंकर के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना अभद्र और अपमानजनक है, भले ही वैचारिक मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों।
खबरों से ज्यादा एंकर्स की चर्चा
यह पहली बार नहीं है जब रुबिका लियाकत किसी गेस्ट से भिड़ी हों, लेकिन सतीश के सिंह जैसे शांत स्वभाव के वरिष्ठ पत्रकार का ऐसा कड़ा रुख चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या न्यूज़ डिबेट्स अब केवल टीआरपी और निजी हमलों का अखाड़ा बनकर रह गई हैं?