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Stephen Hawking Epstein Files: क्या था मशहूर वैज्ञानिक का नाम अनसील्ड दस्तावेजों में? जानिए पूरी सच्चाई

जेफ्री एपस्टीन के अनसील्ड दस्तावेजों में स्टीफन हॉकिंग का नाम आने से दुनिया हैरान है। क्या है स्टीफन हॉकिंग और एपस्टीन के बीच का कनेक्शन? जानिए इस वायरल दावे की पूरी सच्चाई और वायरल ईमेल का राज।

नई दिल्ली: महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking), जिन्होंने ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों और ब्लैक होल्स की गुत्थियों को सुलझाया, आज एक ऐसी वजह से चर्चा में हैं जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कुख्यात अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े अदालती दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद से सोशल मीडिया पर ‘स्टीफन हॉकिंग’ का नाम ट्रेंड कर रहा है।

अक्सर अपनी थ्योरी ऑफ एवरीथिंग के लिए जाने जाने वाले हॉकिंग का नाम इन ‘एपस्टीन फाइल्स’ में आना इंटरनेट पर सनसनी पैदा कर चुका है। लेकिन क्या वाकई हॉकिंग किसी गलत गतिविधि में शामिल थे, या यह सिर्फ एक अधूरा सच है? आइए विस्तार से समझते हैं कि इन दस्तावेजों में वास्तव में क्या लिखा है।

आखिर मामला क्या है? (The Background)

हाल ही में न्यूयॉर्क की एक अदालत ने वर्जीनिया जुफ्रे बनाम गिस्लेन मैक्सवेल मामले से जुड़े सैकड़ों पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक (Unseal) करने का आदेश दिया। इन दस्तावेजों में उन लोगों के नाम शामिल हैं जो कभी न कभी जेफ्री एपस्टीन के संपर्क में रहे थे या उसके निजी द्वीप ‘लिटिल सेंट जेम्स’ पर गए थे।

इन फाइल्स में दुनिया के कई रसूखदार लोगों के नाम सामने आए, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, प्रिंस एंड्रयू और मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का नाम भी शामिल है। जैसे ही हॉकिंग का नाम सामने आया, सोशल मीडिया पर मीम्स और दावों की बाढ़ आ गई, जिससे उनकी छवि पर सवाल उठाए जाने लगे।

फाइल्स में हॉकिंग का जिक्र क्यों है?

दस्तावेजों के अनुसार, स्टीफन हॉकिंग का नाम एक खास ईमेल के संदर्भ में आता है। यह ईमेल जेफ्री एपस्टीन ने साल 2015 में अपनी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल को भेजा था।

ईमेल की मुख्य बात: एपस्टीन ने मैक्सवेल को लिखा था कि वह स्टीफन हॉकिंग के उन दोस्तों या परिवार वालों को इनाम (Reward) देने की पेशकश करे, जो यह साबित करने में मदद कर सकें कि हॉकिंग ने वर्जीनिया जुफ्रे के साथ किसी ‘अंडरएज’ गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईमेल हॉकिंग के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके पक्ष में एक बचाव जैसा प्रतीत होता है। एपस्टीन उन दावों को खारिज करने की कोशिश कर रहा था जो हॉकिंग पर लग सकते थे।

2006 की वो आइलैंड विजिट

यह सच है कि स्टीफन हॉकिंग ने साल 2006 में जेफ्री एपस्टीन के निजी द्वीप ‘लिटिल सेंट जेम्स’ का दौरा किया था। लेकिन यहाँ संदर्भ समझना बेहद जरूरी है। हॉकिंग वहां किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक सम्मेलन (Scientific Conference) में भाग लेने गए थे।

उस समय एपस्टीन ने वर्जिन आइलैंड्स में एक बड़ी साइंस कॉन्फ्रेंस को फंड किया था, जिसमें दुनिया भर के 20 से ज्यादा नामी वैज्ञानिक शामिल हुए थे। हॉकिंग इसी कार्यक्रम का हिस्सा थे। उस दौरान की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं जिसमें हॉकिंग एक बारबेक्यू पार्टी में बैठे नजर आ रहे हैं और सबमरीन राइड का लुत्फ उठा रहे हैं।

क्या हॉकिंग दोषी हैं? (Fact Check)

अब तक सार्वजनिक किए गए किसी भी दस्तावेज़ में स्टीफन हॉकिंग के खिलाफ किसी भी तरह के यौन शोषण या गलत व्यवहार का कोई सबूत नहीं मिला है।

  • वर्जीनिया जुफ्रे के आरोप: वर्जीनिया ने अपनी गवाही में कई बड़े नामों का जिक्र किया, लेकिन उन्होंने कभी भी स्टीफन हॉकिंग का नाम किसी गलत काम के लिए नहीं लिया।
  • वैज्ञानिकों की उपस्थिति: उस समय हॉकिंग के साथ कई अन्य नोबेल पुरस्कार विजेता और भौतिक विज्ञानी भी उस द्वीप पर थे।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावे कि “हॉकिंग ने वहां बच्चों को नग्न देखा” या “वे किसी ओछी हरकत में शामिल थे”, पूरी तरह निराधार हैं और दस्तावेजों में ऐसी किसी भी बात का उल्लेख नहीं है।

एपस्टीन और वैज्ञानिकों का जाल

जेफ्री एपस्टीन को अपनी छवि सुधारने के लिए बड़े वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों के साथ समय बिताना पसंद था। वह अक्सर विज्ञान के क्षेत्र में भारी दान देता था ताकि उसे ‘परोपकारी’ (Philanthropist) के रूप में देखा जाए। स्टीफन हॉकिंग के अलावा हार्वर्ड के प्रोफेसर और कई बड़े थिंकर्स भी अनजाने में या फंडिंग के लालच में उसके संपर्क में आए थे।

सोशल मीडिया और फेक न्यूज़ का दौर

आजकल गूगल सर्च और सोशल मीडिया पर किसी भी मशहूर हस्ती का नाम विवाद से जोड़ना बहुत आसान हो गया है। स्टीफन हॉकिंग जैसे व्यक्ति, जो मोटर न्यूरॉन बीमारी के कारण लगभग पूरी तरह लकवाग्रस्त थे और बोलने के लिए स्पीच सिंथेसाइज़र पर निर्भर थे, उनके खिलाफ इस तरह के भ्रामक दावे उनकी वैज्ञानिक विरासत को धूमिल करने की कोशिश मात्र लगते हैं।

न्यूज़ पोर्टल्स और पाठकों को यह समझना चाहिए कि ‘नाम होना’ और ‘दोषी होना’ दो अलग बातें हैं। एपस्टीन लिस्ट में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति अपराधी है। कई लोग वहां सिर्फ प्रोफेशनल मीटिंग्स, कॉन्फ्रेंस या चैरिटी इवेंट्स के लिए गए थे।

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