नई दिल्ली: भारत में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हालात सामान्य नहीं दिख रहे हैं। एक ओर जहां आम आदमी नवाबगंज जैसे इलाकों में ब्लैक में सिलेंडर खरीदने को मजबूर है, वहीं दूसरी ओर सरकार और बड़ी तेल कंपनियों के बीच अरबों डॉलर की कानूनी जंग छिड़ गई है। दिल्ली में अवैध भंडारण के बड़े रैकेट के खुलासे और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोध के बीच, यह संकट अब केवल रसोई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
रिलायंस और बीपी पर 2.81 अरब डॉलर का बड़ा दावा
इस पूरे संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक कड़ा कदम उठाते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) से 2.81 अरब डॉलर (लगभग 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक) के हर्जाने की मांग की है। यह मामला ओएनजीसी (ONGC) के ब्लॉक से कथित तौर पर गैस की ‘हेराफेरी’ से जुड़ा है। सरकार का आरोप है कि इन कंपनियों ने ओएनजीसी के हिस्से की गैस का इस्तेमाल किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। यह कानूनी पेच और विवाद गैस सप्लाई की अनिश्चितता को और हवा दे रहा है।
हरियाणा: होटलों में थमी रसोई की रफ्तार
हरियाणा में कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में आई भारी बाधा ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। सप्लाई चेन टूटने की वजह से कई छोटे ढाबे और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। कारोबारियों का कहना है कि उन्हें समय पर रिफिल नहीं मिल रही है, जिससे उनके दैनिक कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है।
दिल्ली में अवैध गैस रैकेट का भंडाफोड़: 610 सिलेंडर जब्त
राजधानी दिल्ली में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हाल ही में पुलिस और प्रशासन ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर एक बड़े अवैध गैस भंडारण रैकेट का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में 610 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह रैकेट कमर्शियल और घरेलू सिलेंडरों को अवैध रूप से डंप कर उनकी ब्लैक मार्केटिंग कर रहा था।
नवाबगंज में ‘ब्लैक’ का बोलबाला: उपभोक्ता परेशान
जमीनी हकीकत कितनी डरावनी है, इसका अंदाजा नवाबगंज जैसे कस्बों से लगाया जा सकता है। यहाँ के उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें आधिकारिक वेंडरों से गैस नहीं मिल रही है, जबकि स्थानीय माफिया ऊंचे दामों पर ‘ब्लैक’ में सिलेंडर उपलब्ध करा रहे हैं। अवैध रिफिलिंग की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं, जो जान-माल के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं।
ममता बनर्जी का मोर्चा: केंद्र सरकार पर साधा निशाना
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी की इस कमी को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कोलकाता में विरोध प्रदर्शन करते हुए केंद्र पर आरोप लगाया कि वह राज्यों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रही है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बढ़ती महंगाई और गैस की किल्लत ने आम महिला का बजट बिगाड़ दिया है।
क्यों गहरा रहा है यह संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं:
वैश्विक ऊर्जा बाधा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
कानूनी विवाद: बड़ी तेल कंपनियों और सरकार के बीच जारी खींचतान।
कालाबाजारी: स्थानीय स्तर पर सिलेंडरों की जमाखोरी और अवैध रिफिलिंग।
डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क: कई राज्यों में वितरण प्रणाली का चरमराना।
सरकार का पक्ष और सावधानी की अपील
हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले भी स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है और पैनिक बाइंग (घबराकर खरीदारी) से बचना चाहिए। सरकार का कहना है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं और सप्लाई को पटरी पर लाने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।
