अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के लिए चुनाव के दौरान प्रचार करने वाले एक समर्थक का सोशल मीडिया पोस्ट अब तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में समर्थक ने पार्टी की सांसद प्रिया सरोज और उनके पिता पर गंभीर नाराजगी जताई है।
समर्थक ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद सांसद क्षेत्र में दिखाई नहीं देतीं और जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। पोस्ट में लिखा गया कि चुनाव के समय उन्होंने लोगों से वोट मांगे, प्रचार किया और पार्टी के समर्थन में खुलकर काम किया, लेकिन अब क्षेत्र में विकास और जनसंपर्क को लेकर निराशा है।
Credit:Sunil Yadav PDA (@SudheerYad40842)
वायरल पोस्ट में समर्थक ने लिखा,
“मैंने इनके लिए वोट मांगा था, लोगों से अपील की थी। लेकिन यह बाप-बेटी क्षेत्र में एक भी काम नहीं कर रहे। क्षेत्र में कम और नोएडा-लखनऊ में ज्यादा रहते हैं।”
हैलो आदरणीय अध्यक्ष जी @yadavakhilesh जी. यह हमारी चुनी हुई सांसद @PriyaSarojMP जी है.
मैने इनके लिए वोट मांगा है,लोगो से खूब अपील की थी चुनाव के समय,
इनके बाबू जी के लिए भी वोट मांगा था.लेकिन यह बाप बेटी एक भी काम नहीं किए हैं क्षेत्र में,
यह क्षेत्र में कभी नहीं रहती है,यह… pic.twitter.com/4GU7fyTWcf— Neeraj Kanojia (@NeerajKanojia16) May 9, 2026
पोस्ट में आगे चेतावनी भरे अंदाज में कहा गया कि अगर आने वाले चुनाव में फिर से टिकट दिया गया, तो वह खुद विरोध में प्रचार करेंगे। यही नहीं, समर्थक ने यह भी लिखा कि इस बार किसी के फोन या दबाव में आने वाले नहीं हैं, क्योंकि वह “सच लिखने के लिए प्रतिबद्ध” हैं।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। कई यूजर्स इसे जनता की नाराजगी बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे आंतरिक असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस, समर्थकों में भी बंटी राय
रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक तरफ उनके समर्थक इसे निजी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक छवि और सामाजिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए सवाल उठा रहे हैं। खासकर ग्रामीण और पारंपरिक सोच रखने वाले वर्ग में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

कई लोगों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन और राजनीति से जुड़ा होता है, तो उसकी गतिविधियां स्वतः ही चर्चा का विषय बन जाती हैं। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि निजी रिश्तों को राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर नई बहस जरूर छेड़ दी है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की निजी जिंदगी और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
रिंकू सिंह और प्रिया सरोज भी हार्दिक पांड्या की तरह बनते जा रहे हैं जबकि प्रिया सरोज जन प्रतिनिधि हैं! उनका ये कल्चर देखकर इनकी ही लोकसभा के लोग सवाल कर रहे हैं?
भारतीय संस्कृति में शादी से पहले लड़कियां होने वाले पति के साथ होटलों में नहीं घूमती हैं खासकर तब आप पर और जिम्मेदारी… pic.twitter.com/cMfRTWZs6d
— ShivRaj Yaduvanshi (@shivaxind) May 9, 2026
हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक सांसद प्रिया सरोज या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया अब जनता की नाराजगी जाहिर करने का बड़ा मंच बन चुका है। खासकर चुनाव के बाद जनता अपने जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर लगातार नजर रखती है।
फिलहाल यह पोस्ट इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को किस तरह लेता है।




