उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता विवेक कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर प्रदेश में संचालित मिशनरी विद्यालयों की उच्चस्तरीय जांच कराने और भारतीय सांस्कृतिक व नैतिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
6 मई 2026 को भेजे गए इस ज्ञापन में प्रदेश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को “सांस्कृतिक और नैतिक संकट” से गुजरता हुआ बताया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में कई मिशनरी विद्यालयों पर समय-समय पर धर्मांतरण, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के कमजोर होने और शिक्षा के मूल उद्देश्य से भटकने जैसे आरोप लगते रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कभी प्रदेश की पहचान रहे यूपी बोर्ड और संस्कृत विद्यालय आज अपनी गुणवत्ता और अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। पारंपरिक भारतीय शिक्षा संस्थानों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए चिंता का विषय है।
विवेक कुमार पाण्डेय ने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षा की आड़ में प्रलोभन, प्रभाव या अन्य तरीकों से धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा है, तो यह कानून की भावना के खिलाफ है और इस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किसी छात्र को धार्मिक गतिविधियों या अनिवार्य धार्मिक शिक्षा के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि कहीं ऐसा हो रहा है, तो यह संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन माना जाएगा।
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री जी,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।दिनांक: 06 मई, 2026
विषय: प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में विधिक सुधार, मिशनरी विद्यालयों की जांच, ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ के अनुपालन एवं भारतीय सांस्कृतिक-नैतिक शिक्षा व्यवस्था के… https://t.co/loanZpqQbA pic.twitter.com/lKjl86RB0C
— Adv Vivek kumar Pandey (@vivekkumar84) May 6, 2026
इसके साथ ही शिक्षा के अधिकार और अनुच्छेद 21-A का हवाला देते हुए कहा गया कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होना चाहिए, न कि उनकी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करना।
ज्ञापन में सरकार के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रदेश के सभी मिशनरी विद्यालयों की निष्पक्ष जांच, दोषी संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, गुरुकुल आधारित भारतीय शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना, संस्कृत विद्यालयों और यूपी बोर्ड के लिए विशेष बजट तथा शिक्षा व्यवस्था को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के अनुरूप पुनर्गठित करने की मांग शामिल है।
साथ ही, आवश्यक होने पर विशेष जांच दल यानी SIT गठित कर पूरे प्रदेश में संदिग्ध संस्थानों की जांच कराने की मांग भी की गई है।
इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां कुछ लोग भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था की मांग को सही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के राजनीतिकरण और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत जरूर है, लेकिन इसके लिए संतुलित और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल इस ज्ञापन पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी चर्चा का विषय बन सकता है।




