महिला का आरोप है कि वह अपने पति से पारिवारिक विवाद के चलते न्याय की तलाश में बारादरी थाने पहुंची थी। वहां तैनात दरोगा नरेश बाबू ने मदद का आश्वासन देते हुए कहा, “चिंता क्यों करती हो, मैं हूं ना। मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगा।” अनाथ होने का हवाला देकर महिला ने उनके भरोसे पर विश्वास किया। दरोगा ने नौकरी दिलाने और शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। एक साल तक साथ रहने के दौरान 2026 में महिला गर्भवती हुई, जिसका दरोगा ने जबरन अबॉर्शन करा दिया। जब महिला ने पत्नी का दर्जा मांगा तो दोनों के बीच अनबन हो गई और दरोगा ने उसे अकेला छोड़ दिया।
महिला ने आगे बताया, “मैं अनाथ हूं, इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है। इसलिए मैंने दरोगा का भरोसा कर लिया, लेकिन उसने मेरा भरोसा तोड़ दिया।” उसने सबूत के तौर पर फोटो और वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं। आरोपों में आर्थिक शोषण, जेवर हड़पने और धमकी देने की बात भी शामिल है।
7 जुलाई 2026 को महिला की शिकायत पर एसएसपी अनुराग आर्य ने दरोगा नरेश बाबू को सस्पेंड कर दिया और विभागीय जांच के आदेश दिए। 8 जुलाई को महिला एसपी साउथ अंशिका वर्मा के कार्यालय पहुंची और अपना बयान दर्ज करवाया। जांच एसपी ग्रामीण अंशिका वर्मा को सौंपी गई है। दरोगा का दो साल बाद रिटायरमेंट होने वाला है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर सस्पेंड किया गया है और सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। महिला के पति और परिवार से भी संबंधित विवाद का जिक्र है, जिसमें दरोगा ने पहले हस्तक्षेप किया था।यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर सवाल उठाने वाला है, जहां वर्दीधारी व्यक्ति पर ही शोषण के आरोप लगे हैं। एसएसपी अनुराग आर्य ने सख्ती से कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता और गलत आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।महिला ने आगे कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जबकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है।




