Arya Hospital Barabanki: बेटी की शादी से पहले पिता की मौत—ऑपरेशन थिएटर में टूटी जिंदगी की डोर, परिजनों ने किया घेराव
Arya Hospital Barabanki में पैर के फ्रैक्चर ऑपरेशन के दौरान सत्येंद्र सिंह की मौत। परिजनों ने लापरवाही, ज्यादा पैसे वसूलने और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया।

जिस पिता के घर में बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं, जो अपने परिवार के सुनहरे भविष्य के सपने संजो रहा था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। बेटी की बारात आने में अभी कुछ महीने बाकी थे, लेकिन पिता सत्येंद्र सिंह की जिंदगी की डोर बीच रास्ते में टूट गई। सड़क हादसे में पैर टूटने के बाद इलाज कराने पहुंचे 44 वर्षीय सत्येंद्र की Arya Hospital Barabanki में ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। अब पीछे रह गई है बदहवास पत्नी, पिता को खो चुके बच्चे और ऐसे सवाल, जिनके जवाब परिवार मांग रहा है। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस भरोसे पर भी सवाल है जिसके साथ कोई मरीज और उसका परिवार इलाज के लिए अस्पताल पहुंचता है।
9 अक्टूबर को डंपर ने मारी थी टक्कर, टूट गया था बायां पैर
रामनगर थाना क्षेत्र के धौखरिया, कधईपुर निवासी सत्येंद्र सिंह (44), पुत्र भूधर सिंह, 9 अक्टूबर 2026 को शहाबपुर टोल प्लाजा के पास सड़क हादसे में घायल हो गए थे। बताया गया कि उनकी बाइक में तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी थी। हादसे में उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर हो गया। परिजन उन्हें पहले जिला अस्पताल ले गए और इसके बाद पैसार क्षेत्र के चौधरी नगर स्थित Arya Hospital Barabanki में इलाज के लिए भर्ती कराया। परिवार के मुताबिक 14 अक्टूबर तक सत्येंद्र का इलाज अस्पताल में चला, लेकिन पैर की सूजन कम नहीं होने पर अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल ने दवाइयां लिखकर उन्हें घर भेज दिया।
परिजनों का कहना है कि 17 अक्टूबर को अस्पताल से फोन आने के बाद 18 अक्टूबर को सत्येंद्र को फिर अस्पताल लाया गया। जरूरी जांच कराने के बाद डॉक्टर ने 19 अक्टूबर को ऑपरेशन करने की बात कही। परिवार को उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद सत्येंद्र की परेशानी दूर होगी और वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगे, लेकिन अगले दिन की सुबह उनके लिए कभी न भूलने वाला दुख लेकर आई।
ऑपरेशन थिएटर में मौत, परिवार के सपने चकनाचूर
परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के लिए अस्पताल में रकम जमा कराई गई और 19 अक्टूबर की शाम करीब 6:30 बजे सत्येंद्र सिंह को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया या किसी अन्य दवा की ओवरडोज के चलते उनकी हालत बिगड़ी और कुछ ही लम्हों में मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन से पहले कराई गई जांचों की रिपोर्ट सामान्य थीं और सत्येंद्र को पहले से ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी बीमारी नहीं थी। परिवार ने Arya Hospital Barabanki के इलाज संबंधी दस्तावेजों का हवाला देते हुए मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हार्ट अटैक बताकर लोहिया अस्पताल भेजने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि सत्येंद्र की मौत ऑपरेशन थिएटर में ही हो गई थी, लेकिन अस्पताल संचालक डॉक्टर रोहित अग्रवाल ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए मरीज को हार्ट अटैक आने की बात कहकर Arya Hospital Barabanki की एंबुलेंस से लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों का कहना है कि जब वे सत्येंद्र को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद चिकित्सकों ने एंबुलेंस में ही जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार शव लेकर वापस Arya Hospital Barabanki पहुंचा, जहां परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और जमकर हंगामा शुरू हो गया।
35 हजार में ऑपरेशन की बात, एक लाख से अधिक वसूली का आरोप
मृतक के परिजनों ने इलाज के खर्च को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि 9 अक्टूबर को सत्येंद्र को भर्ती कराते समय ऑपरेशन के लिए करीब 35 हजार रुपये बताए गए थे, लेकिन बाद में ऑपरेशन के नाम पर एक लाख रुपये से अधिक वसूल लिए गए। परिजनों ने यह आरोप भी लगाया कि सत्येंद्र की मौत के बाद उनकी पत्नी को अस्पताल में रोककर रखा गया और बकाया रकम जबरन वसूली गई। स्थानीय लोगों के अनुसार Arya Hospital Barabanki पर इलाज में लापरवाही और मरीजों से अधिक रकम वसूलने के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। लोगों का दावा है कि इससे पहले भी इलाज के खर्च को लेकर अस्पताल परिसर में कई बार हंगामा हो चुका है।
अस्पताल संचालक का पक्ष नहीं मिल सका, पुलिस ने भेजा शव पोस्टमार्टम के लिए
इस मामले में अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर कई बार कॉल की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई, जिसके चलते उनका पक्ष नहीं मिल सका। अस्पताल में हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
अब कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी
अब इस मामले में कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं—सत्येंद्र की मौत किस वजह से हुई, क्या ऑपरेशन और एनेस्थीसिया से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया, मरीज को लोहिया अस्पताल भेजने से पहले उसकी स्थिति क्या थी और इलाज पर खर्च हुई रकम का पूरा विवरण क्या है। इन सवालों का जवाब मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है। परिवार ने Arya Hospital Barabanki पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की जांच से यह भी पता चल सकेगा कि इलाज के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं।
बेटी स्वाती की शादी 10 मार्च को, पिता ने सपने ही देखे रह गए
सत्येंद्र सिंह की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों के मुताबिक उनकी बेटी स्वाती सिंह की शादी तय है और आगामी 10 मार्च को बारात आनी है। घर में शादी की तैयारियों को लेकर पिता के अपने सपने थे। वह बेटी को विदा करने की खुशियों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब परिवार को इस बड़े दुख का सामना करना पड़ रहा है। पत्नी रजनी सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेसुध हो रही हैं। बेटे अंश सिंह और बेटी स्वाती सिंह के लिए भी पिता की मौत का सदमा असहनीय है। जिस परिवार को बेटी की शादी के लिए एकजुट होना था, वह अब अपने मुखिया को खोने के दर्द से जूझ रहा है। परिवार न्याय और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
Arya Hospital Barabanki में मरीजों और परिजनों में चिंता
Arya Hospital Barabanki में इस घटना के बाद अन्य मरीजों और उनके परिजनों में भी चिंता का माहौल है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि जल्द से जल्द इस मामले का समाधान निकाला जाए और मृतक के परिजनों को न्याय दिलाया जाए। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया है। अब जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व है कि जांच कर आरोपों और तथ्यों के बीच फर्क स्पष्ट करे, ताकि सत्येंद्र सिंह की मौत के कारणों पर सवाल उठा रहे परिजनों को उनके सवालों का जवाब मिल सके।


