उन्नाव: खाकी के साये में जुआ-सट्टा का ‘ब्लैक गेम’, आखिर इन बुक माफियाओं पर मेहरबान क्यों है पुलिस? क्या थाने कोतवाली प्रभारी दे रहें है संरक्षण?

उन्नाव (ब्यूरो): जनपद उन्नाव में इन दिनों कानून-व्यवस्था को धता बताते हुए जुआ और सट्टे का काला कारोबार चरम पर है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति दिखाई दे रही है। शहर में बढ़ती चोरी और लूट की वारदातों के पीछे जुए की लत को एक मुख्य कारण माना जा रहा है।

इन इलाकों में सज रही है सट्टे की महफिल

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उन्नाव सदर कोतवाली क्षेत्र और विभिन्न चौकियों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में सट्टेबाजों ने अपना मजबूत जाल बिछा लिया है। मुख्य रूप से निम्नलिखित जगहों पर बुक का खेल धड़ल्ले से चल रहा है:

  • सदर कोतवाली क्षेत्र: रिमझिम फैक्ट्री के सामने सिंगरोसी।
  • चौकी क्षेत्र: कहारों का अड्डा, केसरगंज, सिविल लाइन चौकी के अंतर्गत लोकनगर और झुर्राखन खेड़ा।

सक्रिय बुक माफियाओं की लिस्ट

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि शहर में कुछ नामचीन ‘बुक माफिया’ इस पूरे खेल को संचालित कर रहे हैं। इनमें गुड्डू डिश, सबलू, कालिदीन और सोनू सोनकर जैसे नाम चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि रिमझिम फैक्ट्री के पास होने वाले खेल की कमान सोनू सोनकर नामक युवक के हाथों में है। और सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है सब कुछ कोतवाली से सेट रहता है, किसको कितना देना है।

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क्या पुलिस के संरक्षण में फल-फूल रहा है गोरखधंधा?

आखिर पुलिस इन माफियाओं पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों है? चर्चा तो यह भी है कि इस काले कारोबार में कुछ पुलिसकर्मियों की ‘अहम भूमिका’ और ‘संरक्षण’ शामिल है। यही वजह है कि गांजा बिक्री से लेकर जुआ-सट्टा तक, सदर कोतवाली क्षेत्र अपराधियों के लिए सुरक्षित चारागाह बना हुआ है।

दीपक भूकर के जाते ही माफिया हुए बेखौफ

पूर्व पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के कार्यकाल में हुई छापेमारी के बाद इन माफियाओं में दहशत फैल गई थी और कई पर गाज भी गिरी थी। लेकिन उनके जाते ही माफियाओं ने फिर से अपने पैर पसार लिए हैं। अब शहर के लोगों की निगाहें वर्तमान पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह पर टिकी हैं।

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