
नई दिल्ली/मनामा (बहरीन) : भारतीय नौसेना ने बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित समारोह के दौरान संयुक्त कार्य बल-154 (CTF-154) की कमान सौंप दी। इसके साथ ही सीएमएफ (संयुक्त समुद्री बल) के किसी कार्य बल की कमान संभालने का भारतीय नौसेना का पहला कार्यकाल संपन्न हो गया। यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग, बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण और क्षमता विकास में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
भारतीय नौसेना के नेतृत्व में CTF-154 ने बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण का व्यापक कार्यक्रम संचालित किया। इस दौरान 7,800 से अधिक प्रशिक्षण घंटे पूरे किए गए और कार्य बल की विभिन्न गतिविधियों में 29 देशों के कर्मियों ने भाग लिया।
इस कार्यकाल के दौरान स्टाफ संवर्धन प्रशिक्षण के 20 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा, ऑपरेशन कम्पास रोज 26-1, ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 और समुद्री डकैती तथा सशस्त्र लूटपाट विषय पर विशेषज्ञों के पहले आदान-प्रदान कार्यक्रम (SPAR 2026) का आयोजन भी किया गया।
CTF-154, सीएमएफ का समर्पित बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण कार्य बल है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच अंतरसंचालनीयता, परिचालन तत्परता और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। सीएमएफ के 47 देशों के साझेदारी ढांचे के तहत यह कार्य बल पेशेवर प्रशिक्षण और क्षमता विकास गतिविधियों को बढ़ावा देता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर वर्चुअल, हाइब्रिड और प्रत्यक्ष गतिविधियां शामिल रहीं। इनमें भारतीय नौसेना, सीएमएफ के अन्य कार्य बलों, भागीदार देशों, क्षेत्रीय समुद्री एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की विशेषज्ञता का उपयोग किया गया।
भारतीय नौसेना ने 11 फरवरी 2026 को CTF-154 की कमान संभाली थी। यह सीएमएफ के किसी कार्य बल का नेतृत्व करने का उसका पहला अवसर था। भारत वर्ष 2022 में सीएमएफ में सहयोगी भागीदार के रूप में शामिल हुआ था और 2023 में इसका पूर्ण सदस्य बन गया।
भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले कार्यकाल में CTF-154 ने परिचालन कार्य बलों, क्षेत्रीय भागीदारों और विशिष्ट संस्थानों के साथ पेशेवर सहयोग का विस्तार किया। इससे भविष्य के प्रशिक्षण कार्यक्रमों और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं के विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा मिला।
CTF-154 की कमान सौंपने का यह समारोह सीएमएफ के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा, बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण और क्षमता विकास में भारतीय नौसेना के योगदान को रेखांकित करता है।
इस कार्यकाल के दौरान संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को मजबूत करने में योगदान दिया तथा समुद्री सुरक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भारतीय नौसेना की भूमिका को और सुदृढ़ किया।



