
आयुष सेवा क्षेत्र महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर पैदा कर रहा है। क्षेत्र के हालिया आकलन के अनुसार आयुष सेवा क्षेत्र के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है। वहीं अस्पतालों, डे-केयर केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों और वेलनेस प्रतिष्ठानों जैसे कई संगठित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। आयुष सेवा अर्थव्यवस्था में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में आयुष सेवा क्षेत्र का अनुमानित आकार 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर था। वर्ष 2022-23 से इस क्षेत्र में 16.91 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर दर्ज की गई है। यह क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा, वेलनेस, शिक्षा और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में लगभग 17.6 लाख आजीविकाओं को सीधे सहारा देता है।
आयुष सेवा क्षेत्र में रोजगार की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष सेवा क्षेत्र का विस्तार स्वास्थ्य सेवा, वेलनेस, शिक्षा और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। इसका विस्तार न केवल भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि उद्यमिता, कौशल विकास और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी के लिए भी नए अवसर खोल रहा है। आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर आरआईएस द्वारा जारी आयुष सेवा क्षेत्र रिपोर्ट के अनुसार संगठित आयुष संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्पा और वेलनेस रिसॉर्ट में महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक, शैक्षणिक संस्थानों में 58 प्रतिशत, डे-केयर केंद्रों में 57 प्रतिशत और अस्पतालों में 53 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के ये आंकड़े आयुष सेवा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वेलनेस और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं। स्थानीय और स्वतंत्र रूप से संचालित क्लीनिकों में 10 लाख से अधिक आजीविकाएं जुड़ी हुई हैं। इससे पता चलता है कि आयुष क्षेत्र का रोजगार संबंधी प्रभाव शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी व्यापक है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि गुणवत्ता मानकों, कौशल विकास, डिजिटल सुविधाओं और मजबूत संस्थागत नेटवर्क के सहयोग से संगठित आयुष सेवाओं का विस्तार रोजगार के अवसरों की संख्या और गुणवत्ता दोनों को बढ़ा सकता है। संगठित आयुष संस्थानों में महिलाओं की अधिक भागीदारी यह भी दर्शाती है कि यह क्षेत्र समावेशी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
स्वतंत्र और स्थानीय क्लीनिक आयुष सेवा क्षेत्र में सबसे अधिक राजस्व देने वाला क्षेत्र बने हुए हैं। इनसे लगभग 16.21 अरब अमेरिकी डॉलर यानी कुल क्षेत्र के राजस्व का 43.9 प्रतिशत प्राप्त होता है। डे-केयर केंद्रों से लगभग 10.13 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व आता है। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर आयुष सेवा क्षेत्र के कुल राजस्व में इनकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है। आयुर्वेद आयुष की प्रमुख चिकित्सा प्रणालियों में सबसे बड़ा क्षेत्र है और इससे लगभग 17.73 अरब अमेरिकी डॉलर यानी आयुष सेवा क्षेत्र के कुल राजस्व का लगभग 48 प्रतिशत प्राप्त होता है। वेलनेस क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। इस क्षेत्र ने 21.29 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर दर्ज की है। वहीं योग केंद्रों के राजस्व में दो वर्षों के दौरान लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह लोगों के बीच रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

आयुष क्षेत्र मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में इससे लगभग 1.77 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। विदेशी मरीजों की संख्या कुल मरीजों का लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन अस्पताल क्षेत्र के राजस्व में उनका योगदान लगभग 15 से 25 प्रतिशत है। आयुष से जुड़ी उपचार सेवाओं में मरीज आमतौर पर 5 से 11 दिनों तक रहते हैं। आकलन के अनुसार आयुष सेवा क्षेत्र का आकार वर्ष 2024-25 के 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2047 तक 216 से 318 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, वेलनेस, शिक्षा, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होने की संभावना है। आयुष सेवा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा इसके बढ़ते आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभाव से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, समावेशी विकास और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।




