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यूपी की वोटर लिस्ट पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, पीलीभीत में 16,554 मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का दावा

लखनऊ में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की SIR मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि पीलीभीत सदर में 13,150 नाम बदले गए और कुल 16,554 मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलीं।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी नेताओं ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। कांग्रेस का दावा है कि इस विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 मतदाताओं के नाम हटाए गए और 2,600 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जो कथित तौर पर संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते हैं।

कांग्रेस के अनुसार, इन तीन श्रेणियों को मिलाकर कुल 16,554 मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मामले की जांच कराने और उत्तर प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाता सूची की समीक्षा करने की मांग की है। हालांकि, प्रेसवार्ता में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की अंतिम मसौदा सूची जारी होने के बाद भी मतदाता रिकॉर्ड में बदलाव किए गए। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में अपना नाम, EPIC नंबर और अन्य विवरण देखकर आश्वस्त होने वाले मतदाताओं को बाद में मतदान के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गौतम ने कहा कि यदि किसी मतदाता का EPIC नंबर वही रहे, लेकिन उसके रिकॉर्ड में किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज हो जाए, तो मूल मतदाता के सामने पहचान संबंधी समस्या पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बदलाव कैसे और किन परिस्थितियों में हुए। राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सदर विधानसभा सीट, जिसका निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 127 बताया गया, में 13,150 मतदाताओं के EPIC और सीरियल नंबर समान रहने के बावजूद नाम बदल दिए गए।

कांग्रेस के आरोपों के अनुसार, इसके अतिरिक्त 884 ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनके बारे में पार्टी का कहना है कि वे अब भी संबंधित क्षेत्र में रहते हैं और इस संबंध में आवेदन भी दे चुके हैं। वहीं, 2,600 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का दावा किया गया, जो कथित तौर पर मौके पर मौजूद नहीं रहते। पार्टी ने इन आंकड़ों के आधार पर सवाल उठाया कि यदि एक विधानसभा क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में विसंगतियां सामने आई हैं, तो उत्तर प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में भी ऐसी संभावनाओं की जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता और सोशल मीडिया विभाग की चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेसवार्ता में मतदाता सूची के कुछ कथित उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने दावा किया कि एक रिकॉर्ड में EPIC नंबर 4G-MCM-4746 के साथ मसौदा सूची में मोहम्मद यूसुफ, उम्र 35 वर्ष, पुरुष का नाम दर्ज था। उनके अनुसार, बाद के रिकॉर्ड में उसी EPIC नंबर पर हसरत, पुत्र रमजान अली, उम्र 35 वर्ष, पुरुष का नाम दर्ज पाया गया। कहा कि इस उदाहरण में EPIC नंबर, उम्र और लिंग समान होने के बावजूद मतदाता का नाम और पिता का नाम अलग दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आए हैं और कुछ बदलावों में एक समान पैटर्न दिखाई देता है।

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कांग्रेस ने इन कथित विसंगतियों के आधार पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से मतदाता रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने की आशंका जताई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्वाचन अधिकारियों की जांच आवश्यक है।

सुप्रिया श्रीनेत ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बदलने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से सॉफ्टवेयर तक पहुंच नहीं होने की बात कही जा रही है। उन्होंने सीमा खन्ना की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए और निर्वाचन आयोग से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि मतदाता रिकॉर्ड में कथित बदलाव किसके निर्देश पर हुए और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। पार्टी ने मामले की जांच कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और निर्वाचन आयोग का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष और विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र होने के बावजूद यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदान के दिन सूची में नहीं मिलता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले में कानूनी राय लेगी और SIR प्रक्रिया से संबंधित अपनी आपत्तियों को उचित मंच पर उठाएगी। उनके अनुसार, कांग्रेस का संगठन और कार्यकर्ता मतदाता सूची में कथित विसंगतियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।

सुप्रिया श्रीनेत ने पीलीभीत सदर विधानसभा सीट के पिछले चुनाव परिणाम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में इस सीट से भाजपा विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय सिंह गंगवार ने 6,930 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।कांग्रेस ने दावा किया कि विधानसभा क्षेत्र में कथित तौर पर प्रभावित मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव के जीत के अंतर से काफी अधिक है। पार्टी ने इस आधार पर मतदाता सूची में सामने आई विसंगतियों की गंभीरता की जांच करने की मांग की। हालांकि, मतदाता रिकॉर्ड में कथित बदलाव और चुनाव परिणाम पर उसके संभावित प्रभाव के बीच संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।

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कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि वर्ष 2024 में प्रदेश में लगभग 15.41 करोड़ मतदाता थे और सामान्य परिस्थितियों में हर साल करीब 35 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हो सकती है। उन्होंने वर्ष 2024 से 2027 के बीच नए मतदाताओं के जुड़ने और नाम हटाए जाने के आंकड़ों को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, इस अवधि में लगभग 1.26 करोड़ नए मतदाताओं के जुड़ने की संभावना के मुकाबले करीब 2.04 करोड़ नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग की है। इन आंकड़ों और उनके आकलन की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

सुप्रिया श्रीनेत ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया पर हस्तक्षेप करे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना EPIC नंबर दर्ज करके मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों की जांच करें। कांग्रेस नेताओं ने जिलाधिकारियों (DM) और उपजिलाधिकारियों (SDM) से भी कथित विसंगतियों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। पार्टी का कहना है कि उसके कार्यकर्ता विभिन्न बूथों पर मतदाता रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं और संबंधित दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना किसी एक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने पीलीभीत के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से रिकॉर्ड की जांच कर विसंगतियां सामने लाने के प्रयासों की सराहना की। मसूद ने कहा कि पार्टी इस मामले में अदालत का रुख करेगी और नागरिकों को अपने मताधिकार की सुरक्षा के लिए मतदाता सूची में नाम तथा अन्य विवरण नियमित रूप से जांचने चाहिए।

उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोपों ने मतदाता सूची की शुद्धता, रिकॉर्ड में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज कर दी है। पार्टी ने पीलीभीत सदर के कथित मामलों की जांच कराने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी रिकॉर्ड की समीक्षा करने की मांग की है। अब इस मामले में निर्वाचन आयोग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। आधिकारिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता रिकॉर्ड में बताई गई विसंगतियां किस कारण हुईं और क्या उनमें किसी प्रकार की अनियमितता शामिल थी।

Amresh Dwivedi

अमरेश द्विवेदी देश की एकमात्र बहुभाषी न्यूज़ एजेंसी हिंदुस्थान समाचार में कार्यरत हैं। इसके अलावा हिंदुस्थान समाचार की पाक्षिक पत्रिका युगवार्ता और मासिक पत्रिका नवोत्थान के साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी उनके आलेख छपते रहते हैं।

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