अयोध्या में योगी का वो बयान जिसने सियासत गरमा दी—’गोली चलवाने वाले माफी मांगें’, और उसी दिन सामने आई अखिलेश के दौरे की तारीख
अयोध्या में दीपोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों से माफी मांगने की बात कही। उसी दिन अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की तारीख सामने आई।

अयोध्या में दीपोत्सव का मंच जहां दीयों की रोशनी से जगमगा रहा था, वहीं उसी मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरे प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग अयोध्या आने से पहले माफी मांगें। यह बयान किसी आम राजनीतिक भाषण जैसा नहीं था, बल्कि इसमें वह तीखापन था जो सीधे विपक्ष के निशाने पर जाकर लगता है। और मजेदार बात यह रही कि ठीक उसी दिन अयोध्या में एक और बड़ी खबर सामने आ गई, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया।
दरअसल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 12 दिसंबर को अयोध्या पहुंचने वाले हैं। इस दौरे में वे हनुमानगढ़ी के साथ-साथ राम मंदिर में भी दर्शन-पूजन करेंगे। इसकी जानकारी पूर्व मंत्री और सपा नेता तेजनारायण पांडेय उर्फ पवन ने ठीक दीपोत्सव के मुख्य आयोजन के दिन दी। यानी एक तरफ मुख्यमंत्री मंच से विपक्ष को आड़े हाथों ले रहे थे, और दूसरी तरफ अखिलेश के अयोध्या दौरे का ऐलान भी उसी दिन हो गया। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या यह सिर्फ संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी सियासी रणनीति छिपी है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में यह भी साफ कहा कि अयोध्या अब कभी कर्फ्यू की स्थिति में नहीं पहुंचेगी और न ही कोई यहां दंगा-फसाद करने की हिम्मत करेगा। उन्होंने कहा कि अब रामनगरी की उपेक्षा नहीं की जा सकेगी और न ही यहां के संतों का अपमान करने या रामभक्तों पर गोली चलाने की घटना दोहराने का साहस कोई कर पाएगा। उनका यह बयान सीधे उस पुराने दौर की याद दिलाता है जब अयोध्या में विवादों के दौरान गोलीबारी की घटनाएं हुई थीं और जिसकी गूंज आज भी राजनीति में सुनाई देती है।
दीपोत्सव के मंच से सीएम योगी ने अयोध्या के बदले हुए स्वरूप और उसकी नई पहचान को भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि महज एक लाख 71 हजार दीयों से शुरू हुआ यह आयोजन अब 30 लाख दीयों के आंकड़े को पार कर चुका है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने भगवान श्रीराम से अयोध्या सहित पूरे उत्तर प्रदेश पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की और प्रदेश के लोगों से राम नाम का स्मरण करते हुए रामराज्य की अवधारणा को साकार करने में योगदान देने की अपील भी की। यह अपील सिर्फ धार्मिक नहीं थी, बल्कि इसमें सामाजिक एकता और सद्भावना का संदेश भी छिपा था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अखिलेश यादव के इस अयोध्या दौरे को कैसे देखा जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के नेता पहले भी राम मंदिर को लेकर अखिलेश पर निशाना साधते रहे हैं, और अब जब वे खुद हनुमानगढ़ी और राम मंदिर जाने वाले हैं, तो राजनीति और तेज होना तय है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या एक बार फिर राजनीति का केंद्र बन गई है और दोनों ही दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के मोर्चे खोल चुके हैं। फिलहाल सभी की नजरें 12 दिसंबर पर टिकी हैं कि उस दिन अयोध्या में क्या नजारा देखने को मिलता है और सियासत किस करवट बैठती है।




