Cabinet Decision: सामाजिक सहायता कार्यक्रम 2030-31 तक जारी, अब ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ के नाम से जाना जाएगा
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम यानी एनएसएपी को जारी रखने के लिए ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल परिव्यय 53,428 करोड़ रुपये है और यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। नए प्रस्ताव में तीन बड़े बदलाव किए गए हैं। पहला, योजना और उप-योजनाओं का नाम बदलना। दूसरा, दिव्यांगजन पेंशन के लिए पात्रता मानदंड, कवरेज और सहायता दर में संशोधन। तीसरा, वृद्धजनों तथा विधवाओं के लिए पेंशन योजनाओं और परिवार लाभ योजना को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना।
अब इन नए नामों से जानी जाएंगी योजनाएं
नए प्रस्ताव के तहत सभी योजनाओं और उप-योजनाओं के नाम बदल दिए गए हैं। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के नाम से जाना जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना होगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना कहलाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के नाम से जानी जाएगी। वहीं राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना अब प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना होगी।
दिव्यांगजन पेंशन में बड़े बदलाव, 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर मिलेगा लाभ
दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत सहायता राशि अब 0 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लिए 375 रुपये और 80 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग के लिए 625 रुपये होगी। योजना के अंतर्गत सहायता राशि में वृद्धि के साथ-साथ कुछ और अहम बदलाव भी किए गए हैं। योजना के अंतर्गत बेंचमार्क दिव्यांगता का मानदंड अब 80 प्रतिशत के मुकाबले 40 प्रतिशत होगा। इसका मतलब है कि अब 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले लोग भी इस पेंशन के पात्र होंगे। दिव्यांगता पेंशन के लिए न्यूनतम आयु मानदंड अब जन्म से होगा। यानी जन्म से ही दिव्यांगता वाले बच्चे भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। वृद्धजनों और विधवाओं के लिए पेंशन योजनाएं और पारिवारिक लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।
3.20 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
ग्रामीण विकास विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 3.20 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। यह योजना शत प्रतिशत केंद्रीय सहायता पर चलती है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश भर में लाभार्थियों को समान रूप से सहायता उपलब्ध हो। दिव्यांगजन पेंशन के तहत पात्रता मानदंड, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दर में परिवर्तन से संबंधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी और लागू किए जाएंगे।
क्यों जरूरी हुआ दिव्यांगता पेंशन में बदलाव
भारत के संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के तहत केंद्र सरकार के दायित्व को पूरा करने के लिए गरीब परिवारों को सहायता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को शुरू किया गया था। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत दिव्यांगता पेंशन के लिए पात्रता मानदंडों में बदलाव करना आवश्यक हो गया है और इसे 40 प्रतिशत के मानक दिव्यांगता स्तर से जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त इसमें यह भी अनिवार्य किया गया है कि दिव्यांगता संबंधी सहायता अन्य श्रेणियों के लिए प्रस्तावित समान योजनाओं की तुलना में हमेशा 25 प्रतिशत अधिक हो। यह बदलाव दिव्यांगजनों को सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


