पहली बार अगरतला पहुंचेगी कांदा एक्सप्रेस, पूर्वोत्तर में 2,800 मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आपूर्ति
सरकार ने 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए अगरतला में 440 मीट्रिक टन बफर प्याज भेजा है। पूर्वोत्तर भारत में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और इसे किफायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए अब तक कुल 2,800 मीट्रिक टन से ज्यादा प्याज की आपूर्ति की जा चुकी है।

नई दिल्ली : त्योहारी सीजन में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को किफायती बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में बफर प्याज की आपूर्ति तेज कर दी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत पहली बार त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के लिए कांदा एक्सप्रेस के माध्यम से प्याज भेजने की पहल की है। लगभग 440 मीट्रिक टन प्याज से लदी यह खेप 18 अक्टूबर 2026 तक अगरतला पहुंचने की उम्मीद है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में प्याज की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना, दूरदराज के बाजारों तक इसकी उपलब्धता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर प्याज उपलब्ध कराना है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अब तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में कांदा एक्सप्रेस की दो रेल खेपों और 44 ट्रकों के माध्यम से कुल 2,805 मीट्रिक टन से अधिक बफर प्याज की आपूर्ति की जा चुकी है। इनमें 840 मीट्रिक टन और 452 मीट्रिक टन प्याज वाली दो रेल खेपें शामिल हैं। इसके अलावा, 44 ट्रकों के जरिए कुल 1,513.46 मीट्रिक टन प्याज विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया गया है।
असम, त्रिपुरा और नागालैंड के कई प्रमुख क्षेत्रों में प्याज का वितरण किया गया है। इनमें गुवाहाटी, कामरूप, गोमती, दीमापुर, कोहिमा, निउलैंड, चुमौकेदिमा और सेपाहिजाला शामिल हैं। अगरतला के लिए कांदा एक्सप्रेस की शुरुआत से त्रिपुरा में प्याज वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस पहल से राज्य के आठ में से सात जिलों में बाजार पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इन जिलों में धलाई, दक्षिण त्रिपुरा, खोवाई, उनाकोटी, पश्चिम त्रिपुरा, गोमती, सेपाहिजाला शामिल हैं। इससे प्रमुख उपभोग केंद्रों के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों में भी प्याज की आपूर्ति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
रेल और सड़क परिवहन के संयुक्त इस्तेमाल से सरकार का लक्ष्य क्षेत्रीय बाजारों तक बफर स्टॉक की पहुंच बढ़ाना और आपूर्ति में होने वाली बाधाओं को कम करना है।
सरकार के अनुसार, नई खरीफ फसल की आवक बढ़ने से प्रमुख मंडियों में प्याज की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। अखिल भारतीय औसत मंडी मूल्य सितंबर में लगभग 3,600 रुपये प्रति क्विंटल के उच्चतम स्तर से घटकर अक्टूबर में करीब 3,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। बफर स्टॉक से नियमित रूप से प्याज जारी किए जाने से बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और खुदरा कीमतों पर दबाव कम करने में सहायता मिल रही है।
उपभोक्ता मामलों का विभाग बाजार की मौजूदा परिस्थितियों पर नजर रखते हुए जरूरत के अनुसार प्याज की आपूर्ति जारी रखे हुए है, ताकि त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर प्याज मिल सके। पिछले दो सप्ताह के दौरान देश के 211 शहरों में प्याज की खुदरा कीमतों में 1 से 13 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी आंध्र प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में देखी गई है।
असम में भी लगभग 12 केंद्रों पर प्याज की खुदरा कीमतें प्रति किलोग्राम 1 से 8 रुपये तक कम हुई हैं। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्याज की उपलब्धता और कीमतों के बीच संतुलन बेहतर होने के संकेत मिले हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में असम और राष्ट्रीय स्तर पर प्याज की औसत खुदरा कीमतों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। दो वर्ष पहले असम में प्याज की औसत खुदरा कीमत 61.96 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि अखिल भारतीय औसत 54.13 रुपये प्रति किलोग्राम था। इस तरह दोनों के बीच 7.83 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर था।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, असम में औसत खुदरा कीमत 54.30 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि राष्ट्रीय औसत 53.07 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस तरह कीमतों का अंतर घटकर केवल 1.23 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। यह बदलाव पूर्वोत्तर के बाजारों में आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और क्षेत्रीय मूल्य अंतर कम होने का संकेत देता है।
केंद्र सरकार प्याज की बाजार आवक, खुदरा कीमतों और उपलब्धता की नियमित निगरानी कर रही है। मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखे गए बफर स्टॉक से प्याज जारी करने का निर्णय बाजार की स्थिति, कीमतों के रुझान और आपूर्ति की जरूरतों के आधार पर लिया जाता है। सरकार का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, कीमतों में अनुचित उतार-चढ़ाव को रोकना और उपभोक्ताओं को राहत देना है।
अगरतला के लिए कांदा एक्सप्रेस की पहली खेप पूर्वोत्तर में खाद्य आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे त्रिपुरा में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने, क्षेत्रीय मूल्य अंतर कम करने और त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद मिलने की उम्मीद है।


