
विशाखापत्तनम : भारत और सिंगापुर के बीच आयोजित द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘सिम्बेक्स-2026’ (SIMBEX-2026) का 33वां संस्करण 26 अक्टूबर 2026 को संपन्न हो गया। भारतीय नौसेना द्वारा विशाखापत्तनम में आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग, परिचालन समन्वय और पेशेवर संबंधों को और मजबूत करना था।
सिम्बेक्स-2026 के दौरान सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के फ्लीट कमांडर कर्नल बर्ट्राम एंग ने भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल विशाल बिश्नोई से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने समुद्री सहयोग को बढ़ाने, परिचालन समन्वय को बेहतर बनाने और आपसी हित के विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
इस अभ्यास को दो चरणों—बंदरगाह चरण और समुद्री चरण—में आयोजित किया गया।
बंदरगाह चरण में विषय विशेषज्ञों के बीच बातचीत (SMEE), एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा, पेशेवर चर्चा, खेल प्रतियोगिताएं और संयुक्त योजना से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों से दोनों नौसेनाओं को अपने अनुभव साझा करने और एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।
समुद्री चरण बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया गया। इसमें समुद्री अवरोध अभियान, पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW), हवाई और सतही खतरों से निपटने के अभ्यास, समुद्री कौशल गतिविधियां तथा एक-दूसरे के जहाजों से विमान संचालन शामिल रहे। इन गतिविधियों ने दोनों नौसेनाओं की संयुक्त परिचालन क्षमता और आपसी तालमेल को मजबूत किया।
सिम्बेक्स-2026 में सिंगापुर की नौसेना की ओर से ‘आरएसएस सुप्रीम’ (RSS Supreme) शामिल हुआ। यह फॉर्मिडेबल श्रेणी का स्टील्थ फ्रिगेट है, जिस पर एसएच-70बी हेलीकॉप्टर तैनात था।
भारतीय नौसेना ने स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस नीलगिरि’, पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता से लैस कार्वेट ‘आईएनएस कमोर्ता’ और कई विमानों के साथ भाग लिया। इनमें पी-8आई समुद्री गश्ती विमान, डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान, हॉक उन्नत जेट प्रशिक्षक विमान और एमएच-60आर हेलीकॉप्टर शामिल थे।
सिम्बेक्स भारत और सिंगापुर के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। यह अभ्यास दोनों देशों को संयुक्त संचालन प्रक्रियाओं का अभ्यास करने, समुद्री चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने और रक्षा संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
सिम्बेक्स-2026 का सफल समापन हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रति भारत और सिंगापुर की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


