
नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली में जहां रसोई तेजी और सुविधा की ओर बढ़ रही है, वहीं ताज़ा पिसे आटे और मसालों का पारंपरिक स्वाद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इसी बदलाव के बीच SOFTEL ने घरेलू उपयोग के लिए एक नई कॉम्पैक्ट ‘घरघंटी’ पेश की है, जिसका उद्देश्य परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन स्थापित करना है।

कंपनी के अनुसार, यह नई मशीन घरों में ताज़ा पीसने की पुरानी परंपरा को फिर से आसान बनाने के लिए विकसित की गई है। 35 वर्षों से अधिक के निर्माण अनुभव के साथ सॉफ्टेल का दावा है कि यह उत्पाद घरेलू उपयोग के लिए सुविधाजनक, किफायती और उपयोगकर्ता के अनुकूल है। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन इसे रसोई के प्लेटफॉर्म पर आसानी से रखने योग्य बनाता है, जिससे छोटे घरों में भी इसका उपयोग संभव है।
यह घरघंटी अनाज, बाजरा और विभिन्न मसालों को पीसने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पत्थर आधारित ग्राइंडिंग सिस्टम है, जो पारंपरिक तरीके की तरह खाद्य पदार्थों के स्वाद, सुगंध और पोषण को बनाए रखने में मदद करता है। कंपनी का कहना है कि मशीन प्रति घंटे लगभग 7.5 से 10 किलोग्राम तक पीस सकती है, जबकि इसकी बिजली खपत भी सीमित है, जिससे यह नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त विकल्प बनती है।

उपभोक्ताओं की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे तीन मॉडलों—फुली ऑटोमैटिक, सेमी ऑटोमैटिक और मैनुअल—में उपलब्ध कराया गया है। इससे उपभोक्ता अपनी सुविधा और बजट के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं।
इस अवसर पर कंपनी के प्रबंध निदेशक Anil Kumar Jain ने कहा कि ताज़ा भोजन केवल स्वाद का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का भी आधार है। उनका मानना है कि घर में ताज़ा अनाज पीसने से शुद्धता और पोषण दोनों बनाए रखे जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली में जहां पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड का उपयोग बढ़ा है, वहीं ऐसे उपकरण पारंपरिक खानपान को फिर से अपनाने का अवसर देते हैं। यह पहल न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकती है, बल्कि भारतीय रसोई की पारंपरिक पहचान को भी सशक्त कर सकती है।






