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गंगाघाट नगर पालिका में ‘भ्रष्टाचार की सर्जिकल स्ट्राइक’: लोकायुक्त के रडार पर रसूखदार; भर्ती और बजट में सेंधमारी की जांच शुरू

उन्नाव (राजधानी मार्ग): उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की गंगाघाट नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मकड़जाल सामने आया है जिसने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। लोकायुक्त के कड़े तेवर के बाद मंगलवार को भ्रष्टाचार की ‘जड़’ खोदने के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम ने नगर पालिका के दफ्तर में धावा बोला। आरोप हैं कि यहाँ ‘शुद्धता’ की कसमें खाने वाले अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी की है और अपनों को ‘रेवड़ी’ की तरह नौकरियां बांटी हैं।

लोकायुक्त का ‘हंटर’ और हरदोई की स्पेशल टीम का छापा

शिकायतकर्ता राजेंद्र गुप्ता की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के बजाय बाहरी टीम से जांच कराने का फैसला किया। मंगलवार को हरदोई के जिला विकास अधिकारी (DDO) कमलेश कुमार, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) प्रदीप कुमार पाल और सीनियर ट्रेजरी ऑफिसर की टीम जब नगर पालिका पहुंची, तो वहां मौजूद बाबुओं और अधिकारियों के पसीने छूट गए। टीम ने घंटों तक दफ्तर के दरवाजों को बंद कर आउटसोर्सिंग भर्ती से जुड़े गुप्त दस्तावेजों और भुगतान रजिस्टरों की बारीकी से पड़ताल की।

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अपनों को फायदा और नियमों की ‘बलि’: क्या है पूरा खेल?

भ्रष्टाचार की इस पटकथा में सबसे बड़ा अध्याय ‘आउटसोर्सिंग भर्ती’ का है। आरोप है कि नगर पालिका के रसूखदारों ने चयन प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए अपने सगे-संबंधियों और चहेतों को भर्ती कर लिया। इतना ही नहीं, भुगतान के नाम पर सरकारी धन का ऐसा ‘बंदरबांट’ किया गया कि कागजों पर तो कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन धरातल पर उनकी उपस्थिति का कोई सुराग नहीं था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पारदर्शिता की कमी और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का दुरुपयोग किया गया है, जिसकी अब ‘फॉरेंसिक’ स्तर पर जांच हो रही है।

खामोश गलियारे और गायब होती फाइलें

जांच टीम के आने की खबर से नगर पालिका परिसर में पूरे दिन अफरा-तफरी का माहौल रहा। सूत्रों का कहना है कि टीम ने जब कुछ खास वित्तीय दस्तावेज मांगे, तो अधिकारियों के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। टीम ने न केवल कागजों की जांच की, बल्कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों से तीखे सवाल भी पूछे। यह जांच अब इस बिंदु पर केंद्रित है कि नियुक्तियों के दौरान किन-किन नियमों की ‘बलि’ दी गई और इस खेल में पर्दे के पीछे कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं।

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सख्त एक्शन की तैयारी: नपेंगे बड़े चेहरे

जांच टीम के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि अभिलेखों की शुरुआती जांच में कई विसंगतियां नजर आई हैं। पूरी रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही लोकायुक्त कार्यालय को सौंपी जाएगी। यदि भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप साबित होते हैं, तो न केवल संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरेगी, बल्कि इस घोटाले के मास्टरमाइंड्स के खिलाफ जालसाजी (420) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गंगाघाट की जनता की निगाहें अब लोकायुक्त के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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