भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026 शुरू, पहली बार न्यूजीलैंड के पर्यवेक्षक भी होंगे शामिल
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने केरल के तिरुवनंतपुरम में 'ऑस्ट्राहिंद 2026' की शुरुआत की है, जिसमें 240 सैनिक और न्यूजीलैंड का एक पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है।

तिरुवनंतपुरम : भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांचवें संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026 का सोमवार को केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुभारंभ हुआ। यह सैन्य अभ्यास 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसमें भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना के लगभग 120-120 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, संयुक्त संचालन क्षमता और परिचालन समन्वय को मजबूत करना है। इस बार अभ्यास में पहली बार न्यूजीलैंड का एक पर्यवेक्षक दल भी हिस्सा लेगा।
भारतीय सेना के दल में गढ़वाल राइफल्स के जवानों के साथ अन्य सैन्य शाखाओं और सेवाओं के कर्मी शामिल हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई सेना की ओर से 13 ब्रिगेड के सैनिक अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
ऑस्ट्राहिंद का चौथा संस्करण 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ स्थित इरविन बैरक्स में आयोजित किया गया था।
ऑस्ट्राहिंद 2026 की थीम “संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत द्वीपीय और तटीय वातावरण में संयुक्त उप-पारंपरिक अभियान” है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं की साझा समझ विकसित करेंगी।
सैनिक संयुक्त योजना, सामरिक अभ्यास और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित युद्ध प्रशिक्षण में हिस्सा लेंगे। इसमें हवाई और समुद्री आयामों को भी शामिल किया जाएगा।
अभ्यास के प्रमुख क्षेत्रों में तटीय और द्वीपीय इलाकों में समन्वित सैन्य कार्रवाई, निगरानी एवं टोही, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) से जुड़ी परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया शामिल है।
इसके अलावा, दोनों देशों के सैनिक अपने पेशेवर अनुभव साझा करेंगे और सैन्य अभियानों से जुड़ी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करेंगे।
ऑस्ट्राहिंद 2026 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग, आपसी विश्वास और संयुक्त अभियान क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के दोनों देशों के साझा संकल्प को भी मजबूत करेगा।




