लोन नदी प्रदूषण पर सदर विधायक पंकज गुप्ता की चुप्पी, MLC राम चंद्र प्रधान अकेले उठा रहे आवाज—सवालों के घेरे में विधायक

उन्नाव की लोन नदी में स्लॉटर हाउस और टेनरियों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट के मुद्दे पर सदर विधायक पंकज गुप्ता की चुप्पी अब सवालों के घेरे में आ गई है। अब तक उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और समाचार कवरेज के मुताबिक, विधायक पंकज गुप्ता ने इस गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट पर न तो कोई स्पष्ट और मजबूत सार्वजनिक आवाज उठाई है और न ही जिला मजिस्ट्रेट को इस विषय पर कोई लिखित ज्ञापन या प्रतिनिधित्व दिए जाने की कोई पुष्टि हुई है। यह ऐसा मुद्दा है जिससे हजारों परिवारों की सेहत, खेती और रोजी-रोटी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है, लेकिन फिर भी सदर विधायक की ओर से इस पर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।
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साल 2025 और 2026 की प्रमुख खबरों में लोन नदी प्रदूषण, टैंकरों से अपशिष्ट छोड़ने और स्लॉटर हाउस तथा टेनरियों के उल्लंघन से जुड़ी कई रिपोर्ट्स सामने आईं। इन खबरों में विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान का नाम बार-बार आया। मार्च 2026 में उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि कई स्लॉटर हाउस और टेनरियां सीईटीपी का सही उपयोग नहीं कर रही हैं और बिना शोधन के गंदा पानी सीधे नालों में बहाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, इन प्रदूषण संबंधी खबरों में सदर विधायक पंकज गुप्ता का नाम कहीं भी मुख्य रूप से सामने नहीं आया। यही वजह है कि अब लोग यह सवाल पूछने लगे हैं कि जब पूरा इलाका जहरीले पानी से बीमार पड़ रहा है, तो स्थानीय विधायक की आवाज कहां है।
गौरतलब है कि पंकज गुप्ता हाल के महीनों में कई अन्य मुद्दों पर काफी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने सितंबर 2026 में बाढ़ राहत सामग्री वितरण और मेडिकल कैंप का आयोजन किया। जनता दर्शन में बिजली, सड़क और आधार कार्ड जैसी शिकायतें सुनीं। पोस्टमार्टम हाउस का औचक निरीक्षण कर सुधार के निर्देश दिए। जिला पंचायत बाबू के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। पृथ्वी दिवस पर प्लास्टिक छोड़ने की अपील की और पौधरोपण किया। विकास कार्यों की निगरानी समिति की बैठकों में भी हिस्सा लिया। ये सभी महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दे हैं, लेकिन लोन नदी प्रदूषण पर उनका कोई बयान, पत्र या ज्ञापन सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
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इस चुप्पी के पीछे की असली वजह क्या है, इसका कोई स्पष्ट जवाब सार्वजनिक जानकारी के आधार पर नहीं दिया जा सकता, क्योंकि विधायक ने खुद इस पर कोई बयान नहीं दिया है। संभावित कारणों में यह हो सकता है कि उनका फोकस फिलहाल बाढ़ राहत, बिजली, विकास कार्यों और अन्य स्थानीय शिकायतों पर ज्यादा रहा हो। दूसरा, प्रदूषण का मुद्दा मुख्य रूप से दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र और पुरवा-बीघापुर-सुमेरपुर क्षेत्र से जुड़ा है, जो सदर विधानसभा के अलावा अन्य क्षेत्रों से भी प्रभावित है। तीसरा, औद्योगिक हितों और रोजगार के सवालों को देखते हुए यह राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील मुद्दा हो सकता है। या फिर उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर चुपचाप बात की हो, लेकिन उसकी कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुल मिलाकर, अभी तक उपलब्ध समाचार कवरेज के अनुसार सदर विधायक पंकज गुप्ता ने इस गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट पर न तो सार्वजनिक रूप से मजबूत आवाज उठाई है और न ही डीएम को लिखित ज्ञापन दिए जाने की कोई पुष्टि हुई है। अगर उन्होंने कोई निजी या प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाया हो, तो वह सार्वजनिक डोमेन में नहीं आया है। इस पूरे मुद्दे पर सबसे सक्रिय आवाज फिलहाल एमएलसी राम चंद्र प्रधान की रही है, जिन्होंने समय-समय पर स्लॉटर हाउस और टेनरियों के उल्लंघन को सार्वजनिक रूप से उठाया है। यह सभी जानकारी सार्वजनिक समाचार स्रोतों पर आधारित है। नवीनतम जानकारी के लिए विधायक कार्यालय या आधिकारिक बयान से पुष्टि की जा सकती है।



