उत्तर प्रदेशराजनीतिलखनऊ

लखनऊ में एक और अफसर ने छोड़ी सरकारी नौकरी—जिसकी मां पूर्व सांसद और पति सपा का बड़ा चेहरा, क्या अब खुद चुनाव मैदान में उतरेंगी?

उत्तर प्रदेश में एक और वरिष्ठ अफसर ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। अनुपमा सरोज सिंह की मां पूर्व सांसद और पति सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। सियासी गलियारों में चर्चा तेज।

लखनऊ की सियासी गलियारों में इन दिनों एक नाम चर्चा में है—अनुपमा सरोज सिंह। राज्य कर विभाग में उप आयुक्त के पद पर तैनात इस वरिष्ठ अधिकारी ने सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है और राज्य सरकार ने उनका आवेदन मंजूर भी कर दिया है। यह खबर अपने आप में बड़ी है, लेकिन इसे और बड़ा बनाती है वह टाइमिंग, जिसमें यह इस्तीफा आया है। कुछ ही महीने पहले वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी दिव्या मित्तल ने भी इस्तीफा दिया था। अब दो बड़ी महिला अफसरों का एक के बाद एक सिस्टम से बाहर निकलना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है।

दीपों का पर्व लाए खुशियों की बहार! पंकज गुप्ता की ओर से धनतेरस एवं दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। दीपों का पर्व लाए खुशियों की बहार! पंकज गुप्ता की ओर से धनतेरस एवं दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

अनुपमा सरोज सिंह की पहचान सिर्फ एक सरकारी अफसर की नहीं है। लखनऊ में लोग उन्हें ‘अनुपमा राग’ के नाम से भी जानते हैं। दिन में वह जीएसटी विभाग की फाइलें और कर वसूली की जटिलताएं संभालती थीं, तो शाम को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड की धुनों और सांस्कृतिक गतिविधियों में डूब जाती थीं। यही वजह है कि उनका यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक इस्तीफा नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया राजनीतिक फैसला माना जा रहा है। सरकार की मंजूरी मिलने के तुरंत बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसे राजनीति में उनके प्रवेश की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

THE DiMo – Dimsum & Momo की ओर से आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

उस वीडियो में उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था के अपने सख्त नियम और सीमाएं होती हैं। एक वक्त ऐसा आता है जब यह समझ आने लगता है कि सिर्फ नीतियां लागू करना काफी नहीं है। समाज में सच्चा बदलाव लाने के लिए, खासकर जमीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, सरकारी दफ्तर के आरामदायक दायरे से बाहर निकलना पड़ता है और खुद बदलाव का हिस्सा बनना पड़ता है। यह बयान सुनते ही साफ हो गया कि वह अब सिर्फ अफसर नहीं, बल्कि एक राजनीतिक भूमिका के लिए तैयार हैं।

दीपों का पर्व, खुशियों की सौगात! प्रवीण मिश्रा भानू की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

लेकिन असली कहानी उनके परिवार में छिपी है। अनुपमा सरोज सिंह पूर्व सांसद और वरिष्ठ दलित नेता सुशीला सरोज की बेटी हैं, जिनका अवध क्षेत्र में जमीनी स्तर पर गहरा प्रभाव माना जाता है। वहीं उनके पति अनुराग भदौरिया समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और टेलीविजन की बहसों में लगातार नजर आते हैं। इन रिश्तों को देखते हुए राजनीतिक जानकार यह मान रहे हैं कि उनका राजनीति में आना अखिलेश यादव की पार्टी की आने वाली रणनीति का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक उन्हें पढ़ी-लिखी शहरी महिलाओं और दलित समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए एक बड़े चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सीतापुर जिले की सिधौली विधानसभा सीट से उनके चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

यह भी पढ़ें  एडीशनल डीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे को मिला ‘डॉ. तारा सिंह साहित्य राष्ट्रीय सम्मान-2026’
खुशियों का त्योहार, स्वादिष्ट खाने के साथ! ✨ Anaya’s Kitchen की ओर से आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

दिलचस्प बात यह है कि यह इस्तीफा अकेला नहीं है। इससे पहले अगस्त में दिव्या मित्तल नाम की वरिष्ठ अधिकारी ने भी अपनी नौकरी छोड़ी थी। दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ीं दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर और संत कबीर नगर में जिलाधिकारी रहते हुए अलग पहचान बनाई थी। लेकिन इस्तीफे के बाद उन्होंने अलग रास्ता चुना और अपनी खुद की स्वतंत्र राजनीतिक पहल बनाने की घोषणा कर दी। अब उत्तर प्रदेश में एक साथ दो पूर्व महिला अधिकारियों का राजनीति के मैदान में उतरना यह दिखाता है कि महिला नेतृत्व का चेहरा बदल रहा है। पहले जहां राजनीति में पहचान के लिए परिवारवाद का सहारा लिया जाता था, अब प्रशासनिक अनुभव रखने वाली महिलाएं भी मैदान में उतर रही हैं।

अब आपके बिजनेस की पहचान होगी Google Search पर और भी मजबूत! इस दीपावली Akshant Media Solution के साथ अपने ब्रांड को डिजिटल पहचान दिलाएँ।

इस पूरे घटनाक्रम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि राज्य में प्रशासनिक माहौल दमघोंटू हो चुका है और ईमानदार अफसर लगातार राजनीतिक दबाव झेल रहे हैं, इसीलिए वे नौकरी छोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इन आरोपों को बेबुनियाद बताता है। सरकार का कहना है कि कुछ अधिकारियों के मन में पहले से ही राजनीतिक महत्वाकांक्षा थी और वे सरकारी पद को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। सरकार का यह भी कहना है कि सेवानिवृत्ति का आवेदन इतनी जल्दी मंजूर होना यह दिखाता है कि प्रशासन हर नागरिक को लोकतंत्र में अपनी किस्मत आजमाने की आजादी देता है।

यह भी पढ़ें  गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध: रायबरेली पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- 'हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद है, हिंसा नहीं'

अब सबकी नजरें 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। लखनऊ के हजरतगंज से लेकर हर जिले तक इस बदलाव की गूंज सुनाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के लिए अनुपमा सरोज सिंह का चेहरा दोहरा फायदा दे सकता है—एक तरफ उनका प्रशासनिक अनुभव सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने में मदद करेगा, तो दूसरी तरफ उनकी मां की राजनीतिक विरासत दलित वोटों को साधने में काम आएगी। वहीं दिव्या मित्तल जैसी स्वतंत्र पहल के लिए चुनौती यह होगी कि सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता को जमीनी वोटों में कैसे बदला जाए। जो भी हो, इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब एक नया अध्याय शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में यह अध्याय और दिलचस्प होने वाला है।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे क्राइम की खबरें लिखते हैं और डिजिटल मीडिया का काम भी करते हैं। उन्होंने दूरदर्शन न्यूज़ में डिजिटल हेड और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम किया है। वे अंडरकवर रिपोर्टिंग और स्टिंग ऑपरेशन भी करते रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button