दक्षता, करुणा और चरित्र को बनाएं जीवन का मूल मंत्र : उपराष्ट्रपति
सीपी राधाकृष्णन ने एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में युवा डॉक्टरों और नर्सों से करुणा, दक्षता व नैतिकता के साथ सेवा करने का आह्वान किया। 173 विद्यार्थियों में 132 छात्राएं रहीं।

देवघर, झारखंड : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवा चिकित्सा पेशेवरों से दक्षता, करुणा, सत्यनिष्ठा और चरित्र को अपने व्यावसायिक जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के वंचित और कमजोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
उपराष्ट्रपति ने आज झारखंड स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एम्स देवघर संथाल परगना क्षेत्र की आकांक्षाओं और जनजातीय एवं ग्रामीण समुदायों के लिए बेहतर चिकित्सा शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते अवसरों का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय और ग्रामीण समुदायों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच उपलब्ध कराना विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी की विरासत का उल्लेख करते हुए स्नातकों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग गांवों, आदिवासी समुदायों तथा देश के दूरदराज के क्षेत्रों की सेवा में करने का आग्रह किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा संबंधी ज्ञान का सर्वोच्च उद्देश्य मानवता और समाज की सेवा करना है। चिकित्सा की डिग्री उपलब्धि के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसे संवेदनशीलता, समर्पण और नैतिक मूल्यों के साथ निभाया जाना चाहिए।
सीपी राधाकृष्णन ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में एम्स देवघर के योगदान की सराहना की। उन्होंने मलेरिया उन्मूलन, लसीका फाइलेरिया की निगरानी, एनीमिया नियंत्रण, श्रवण स्वास्थ्य और विद्यालय स्वास्थ्य से जुड़ी सामुदायिक पहलों को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि किसी चिकित्सा संस्थान की जिम्मेदारी उसके परिसर तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे आसपास के समुदायों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेजों की संख्या वर्ष 2014 से पहले के 387 से बढ़कर 846 हो गई है।
उन्होंने कहा कि एम्स देवघर जैसे संस्थान देश में संतुलित और समावेशी विकास की परिकल्पना को साकार करते हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक राज्य, जिले और गांव तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
दीक्षांत समारोह में स्नातक होने वाले 173 विद्यार्थियों में से 132 छात्राओं की संख्या पर उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में देश की प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत बताया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा महिलाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें साकार करने के अवसर प्रदान करती है, जिससे समाज और राष्ट्र के विकास को नई गति मिलती है।
युवा चिकित्सा पेशेवरों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), टेलीमेडिसिन और डिजिटल निदान जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी से अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दूरदराज के गांवों और वंचित समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए।
उन्होंने युवा पीढ़ी के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। साथ ही, रोगियों की देखभाल में नर्सिंग पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए उनके योगदान को स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न अंग बताया।
उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एम्स देवघर झारखंड और पूर्वी भारत के व्यापक क्षेत्र में नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक अनुसंधान और करुणापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ेगा।
समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, लोकसभा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, राज्यसभा सांसद प्रदीप कुमार वर्मा, देवघर के विधायक सुरेश पासवान, एम्स देवघर की अध्यक्ष प्रोफेसर एमवी पद्मा श्रीवास्तव तथा संस्थान के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर नितिन एम. गंगाने सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, संकाय सदस्य, विद्यार्थी और उनके परिजन उपस्थित रहे।
अपने संबोधन के समापन पर उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से दक्षता, करुणा और चरित्र को अपने पेशेवर जीवन का आधार बनाने तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।




