

गाैरतलब है कि, इसका इस्तेमाल भारतीय क्रिकेटर शुभमन गिल के अलावा स्टार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और जाेमैटाे के सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल करते देखे गए हैं।
टेंपल एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे सिर के कनपटी वाले हिस्से में, माथे और कान के बीच लगाया जाता है। इसे त्वचा पर चिपकाने के लिए विशेष एडहेसिव स्ट्रिप्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसका डिजाइन ऐसा है कि इसे रोजमर्रा की गतिविधियों और शारीरिक अभ्यास के दौरान पहना जा सके। सामान्य फिटनेस ट्रैकर मुख्य रूप से कलाई या उंगली से मिलने वाले संकेतों के आधार पर शरीर की गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं। इसके विपरीत, टेंपल सिर के पास से ऑप्टिकल संकेत एकत्र करता है और उनका विश्लेषण करके कुछ विशेष मापदंड प्रस्तुत करता है।
इस डिवाइस के दो प्रमुख फीचर हैं- ब्रेनफ्लो और एंट्रॉपी स्कोर। पहला मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से संबंधित बदलावों के संकेतों पर केंद्रित है, जबकि दूसरा शरीर की शारीरिक सक्रियता और उस पर पड़ने वाले दबाव से जुड़े संकेतों को एक संख्यात्मक स्कोर के रूप में दिखाता है।
टेंपल का पहला प्रमुख फीचर ब्रेनफ्लो है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से संबंधित बदलावों को ट्रैक करना है। मस्तिष्क को सामान्य रूप से काम करने के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसलिए मस्तिष्क में रक्त संचार से जुड़े बदलावों का अध्ययन चिकित्सा विज्ञान और न्यूरोसाइंस में महत्वपूर्ण माना जाता है।
ब्रेनफ्लो के माध्यम से टेंपल सिर की कनपटी के पास स्थित ऊतकों और रक्त वाहिकाओं से मिलने वाले संकेतों का विश्लेषण करता है। इसके बाद सॉफ्टवेयर इन संकेतों के आधार पर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से जुड़े बदलावों का अनुमान लगाने का प्रयास करता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्रेनफ्लो को मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से संबंधित संकेतों का आकलन करने वाला मापदंड समझना चाहिए। इसे मस्तिष्क तक पहुंचने वाले रक्त की वास्तविक मात्रा का प्रत्यक्ष और पूर्ण माप नहीं माना जा सकता। त्वचा, खोपड़ी और आसपास के ऊतकों में रक्त प्रवाह भी सेंसर के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
कंपनी ने इस तकनीक की तुलना स्थापित चिकित्सा मापन विधियों से करने वाले शुरुआती अध्ययन भी साझा किए हैं। हालांकि, इसकी सटीकता और अलग-अलग परिस्थितियों में विश्वसनीयता का आकलन करने के लिए व्यापक तथा स्वतंत्र वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है।
टेंपल का दूसरा प्रमुख फीचर एंट्रॉपी स्कोर है। यह 1 से 250 के बीच एक संख्यात्मक स्कोर देता है और इसे शरीर की शारीरिक सक्रियता तथा ऊर्जा की मांग में होने वाले बदलावों को समझने के लिए विकसित किया गया है।
कंपनी के अनुसार, नींद, तनाव, व्यायाम, कैफीन का सेवन और ध्यान जैसी गतिविधियां इस स्कोर को प्रभावित कर सकती हैं। कम स्कोर अपेक्षाकृत आराम की स्थिति से जुड़ा हो सकता है, जबकि अधिक स्कोर शारीरिक सक्रियता या बढ़ी हुई शारीरिक मांग के दौरान दिखाई दे सकता है। यह स्कोर लगातार अपडेट होने के लिए बनाया गया है।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति आराम करने के दौरान और कठिन व्यायाम के बाद अपने स्कोर की तुलना कर सकता है। इसी तरह, वह अलग-अलग दिनों में नींद और शारीरिक गतिविधियों के साथ अपने आंकड़ों में होने वाले बदलावों को देख सकता है।
हालांकि, एंट्रॉपी स्कोर एक कंपनी-विशिष्ट मापदंड है। इसे तनाव, थकान या किसी बीमारी का निश्चित माप नहीं मानना चाहिए। इसकी गणना किस तरह की जाती है और यह शरीर की अलग-अलग अवस्थाओं को कितनी सटीकता से दर्शाता है, यह स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाणों से स्थापित होना आवश्यक है।
टेंपल की कार्यप्रणाली में पीपीजी यानी फोटोप्लेथिस्मोग्राफी तकनीक की भूमिका बताई जाती है। इस तकनीक का इस्तेमाल कई स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड में भी किया जाता है। पीपीजी में सेंसर त्वचा पर प्रकाश डालता है और ऊतकों से वापस आने वाले प्रकाश में होने वाले बदलावों को मापता है। रक्त वाहिकाओं में रक्त की मात्रा बदलने पर प्रकाश के अवशोषण और परावर्तन में भी बदलाव आ सकता है। सेंसर इन परिवर्तनों को रिकॉर्ड करता है और सॉफ्टवेयर प्राप्त संकेतों का विश्लेषण करता है।
टेंपल में सिर के कनपटी वाले हिस्से से संकेत एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद डिवाइस का सिस्टम इन संकेतों को संसाधित करके ब्रेनफ्लो और एंट्रॉपी जैसे मापदंड तैयार करने में मदद करता है।
यह समझना जरूरी है कि पीपीजी अपने आप मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड नहीं करता। यह EEG यानी इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी से अलग तकनीक है, जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि मापी जाती है। इसी तरह, प्रकाश आधारित संकेतों से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह का सटीक आकलन करने के लिए विशेष एल्गोरिदम और वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता होती है।
टेंपल से प्राप्त संकेतों का विश्लेषण करने के बाद संबंधित जानकारी मोबाइल ऐप पर दिखाई जाती है। इससे उपयोगकर्ता समय के साथ अपने आंकड़ों में होने वाले बदलावों को देख सकते हैं और अलग-अलग गतिविधियों के दौरान प्राप्त परिणामों की तुलना कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया को तीन चरणों में समझा जा सकता है। डेटा संग्रह- सेंसर त्वचा और रक्त वाहिकाओं से संबंधित ऑप्टिकल संकेत रिकॉर्ड करता है। डेटा विश्लेषण- डिवाइस का सिस्टम इन संकेतों का विश्लेषण करके संबंधित मापदंड तैयार करता है। वहीं, प्राप्त परिणाम ऐप के जरिए उपयोगकर्ता को माेबाइल पर दिखाए जाते हैं। इस तरह का लगातार डेटा व्यक्ति को अपनी शारीरिक प्रतिक्रियाओं के पैटर्न समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, आंकड़ों में बदलाव का कारण केवल एक गतिविधि को मान लेना सही नहीं होगा क्योंकि शरीर की प्रतिक्रिया कई कारकों से प्रभावित हो सकती है।
क्रिकेट जैसे प्रतिस्पर्धी खेल में खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता के साथ-साथ आराम, रिकवरी और लगातार अभ्यास के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय दौरों में लंबी यात्रा, मौसम में बदलाव, समय क्षेत्र का अंतर और व्यस्त कार्यक्रम भी खिलाड़ियों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं। टेंपल जैसे उपकरण भविष्य में खेल वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों को शारीरिक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने में सहायता दे सकते हैं। इनके आंकड़ों से यह समझने की कोशिश की जा सकती है कि अलग-अलग गतिविधियों, आराम और अभ्यास के दौरान शरीर के संकेत किस तरह बदलते हैं। लेकिन यह दावा करना जल्दबाजी होगी कि टेंपल पहनने से किसी खिलाड़ी की एकाग्रता, बल्लेबाजी या प्रदर्शन अपने आप बेहतर हो जाएगा। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके मापदंड कितने विश्वसनीय हैं और उनका खेल प्रदर्शन से क्या संबंध स्थापित होता है।
टेंपल जैसी उभरती तकनीक के लिए वैज्ञानिक सत्यापन सबसे महत्वपूर्ण है। कनपटी के पास मौजूद त्वचा, खोपड़ी और रक्त वाहिकाओं से मिलने वाले संकेतों को अलग-अलग पहचानना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए डिवाइस की रीडिंग को सीधे मस्तिष्क के स्वास्थ्य का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, एंट्रॉपी स्कोर को भी किसी बीमारी की पहचान करने या चिकित्सकीय निर्णय लेने का विकल्प नहीं समझना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लगातार सिरदर्द, चक्कर या अन्य चिंताजनक लक्षण हों, तो उसे डिवाइस के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
फिलहाल, इसे व्यक्तिगत वेलनेस और अनुसंधान की संभावनाओं वाले उपकरण के रूप में देखना अधिक उचित है। इसकी सटीकता, उपयोगिता और वास्तविक लाभों का आकलन आगे होने वाले स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययनों से ही किया जा सकेगा। यदि यह तकनीक विश्वसनीय साबित होती है तो भविष्य में यह फिटनेस, खेल विज्ञान और शरीर की प्रतिक्रियाओं के अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



