तरंग शक्ति-2026: भारतीय वायु सेना ने बदलते युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति की भूमिका पर किया मंथन, आधुनिक तकनीक और संयुक्त अभियानों पर जोर
तरंग शक्ति-2026 के तहत भारतीय वायु सेना और CAPSS ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति, मानवरहित विमानों, डेटा नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग पर संगोष्ठी आयोजित की।

नई दिल्ली : भारतीय वायु सेना और सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज (CAPSS) ने तरंग शक्ति-2026 अभ्यास के तहत 9 अक्टूबर को नई दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायु सेना सभागार में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का विषय ‘बदलते युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति की केंद्रीय भूमिका’ रहा। इसमें विभिन्न महाद्वीपों की सहयोगी वायु सेनाओं के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और मीडिया से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी में आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति, हवाई अभियानों में तकनीक की बढ़ती भूमिका, मानवयुक्त और मानवरहित विमानों के समन्वय तथा सहयोगी देशों की वायु सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य भविष्य की रणनीतिक प्राथमिकताओं की पहचान करना और अंतरराष्ट्रीय वायु सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत करना था।
भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य के हवाई युद्ध में सफलता के लिए एकीकृत क्षमताएं, परिचालन मजबूती और विभिन्न वायु सेनाओं के बीच बेहतर अंतर-संचालनीयता आवश्यक होगी।
उन्होंने मानवयुक्त और मानवरहित अभियानों के समन्वित विकास पर जोर देते हुए कहा कि विमानों, सेंसर, हथियार प्रणालियों और मानवरहित प्लेटफॉर्म को शुरुआत से ही संचार एवं डेटा नेटवर्क के साथ एकीकृत करना जरूरी है। इससे बदलती परिचालन परिस्थितियों में बेहतर तालमेल और प्रभावी निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने, प्रशिक्षण के नए तरीकों को अपनाने और लंबे समय तक चलने वाले अभियानों को बनाए रखने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता भी बताई।
वायु सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक समय में वायु शक्ति की भूमिका केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। मानवीय सहायता, सहयोगी देशों को समर्थन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने सूचना युद्ध और धारणा प्रबंधन जैसे विषयों पर अधिक विचार-विमर्श करने की जरूरत बताई। साथ ही, उन्होंने सहयोगी वायु सेनाओं के बीच परिचालन अनुभव साझा करने और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
सीएपीएसएस के महानिदेशक एयर मार्शल नागेश कपूर (सेवानिवृत्त) ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने समकालीन संघर्षों में वायु शक्ति के बढ़ते महत्व और इस क्षेत्र में संस्थान के योगदान पर प्रकाश डाला।
सीएपीएसएस की स्थापना वर्ष 2001 में राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु और अंतरिक्ष से संबंधित मुद्दों पर अनुसंधान एवं विश्लेषण के लिए एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी। वर्ष 2026 संस्थान की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने का अवसर है।
संगोष्ठी के पहले कार्य सत्र की अध्यक्षता पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने की। इस सत्र में 21वीं सदी में हवाई युद्ध के बदलते स्वरूप और वायु शक्ति की विकसित होती अवधारणाओं पर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक वायु शक्ति अब केवल आसमान में श्रेष्ठता हासिल करने तक सीमित नहीं है। इसमें पूरे युद्धक्षेत्र पर प्रभाव स्थापित करना, निर्णय लेने की प्रक्रिया में बढ़त हासिल करना और मीडिया की रणनीतिक भूमिका को समझना भी शामिल है।
सत्र में इस बात पर भी विचार किया गया कि आधुनिक युद्ध में वायु अभियानों को व्यापक परिचालन व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखने की जरूरत है, जिसमें तकनीक, सूचना और रणनीतिक समन्वय की अहम भूमिका होती है।
दूसरे कार्य सत्र की अध्यक्षता रॉयल ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना के प्रमुख एयर मार्शल स्टीफन चैपल ने की। इस सत्र में राष्ट्रीय शक्ति के रणनीतिक साधन के रूप में वायु शक्ति की भूमिका का विश्लेषण किया गया।
चर्चा के प्रमुख विषयों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना, विरोधी पर रणनीतिक दबाव बनाना, तनाव को नियंत्रित करना और मानव संसाधन का विकास शामिल रहा। प्रतिभागियों ने भविष्य की परिचालन जरूरतों के अनुरूप वायु सेनाओं में आवश्यक बदलावों पर भी विचार किया।
सत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वायु शक्ति का प्रभावी उपयोग संघर्ष को रोकने, प्रतिरोध स्थापित करने और संघर्ष की तीव्रता को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
तरंग शक्ति-2026 के तहत आयोजित इस संगोष्ठी में सामने आए विचारों ने भविष्य के हवाई युद्ध में तकनीकी एकीकरण, परिचालन अनुभवों के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से शामिल प्रतिभागियों के साथ ऑनलाइन माध्यम से जुड़े लोगों को भी वायु शक्ति के भविष्य और बदलती सैन्य रणनीतियों पर विभिन्न दृष्टिकोण जानने का अवसर मिला। संगोष्ठी का मुख्य संदेश यह रहा कि आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी नवाचार, बेहतर प्रशिक्षण, मजबूत रसद व्यवस्था और सहयोगी वायु सेनाओं के बीच समन्वय आवश्यक है।

