भारतीय नौसेना को मिला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘अमिनी’
GRSE ने भारतीय नौसेना को स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर पोत 'अमिनी' सौंपा है। 80% से अधिक स्वदेशी पुर्जों से बना यह पोत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करता है।

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘अमिनी’ को 5 नवंबर 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। यह युद्धपोत देश की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दर्शाता है।
अमिनी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रेणी के युद्धपोतों में शामिल है। इसका डिजाइन और निर्माण GRSE कोलकाता ने इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार किया है।
ये युद्धपोत भारतीय नौसेना के प्रमुख उथले पानी में संचालित होने वाले पनडुब्बी रोधी पोतों में शामिल हैं। अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और सोनार प्रणाली से लैस अमिनी पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम है।
इस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता के साथ-साथ तटीय निगरानी और बारूदी सुरंग बिछाने की परिचालन क्षमताओं को भी मजबूती मिलेगी। इससे भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।
‘अमिनी’ नाम लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह पोत पूर्ववर्ती पेट्या तृतीय श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोत INS अमिनी की अगली पीढ़ी है। पुराने INS अमिनी को वर्ष 2002 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था। नए युद्धपोत के माध्यम से भारतीय नौसेना ने अपनी गौरवशाली परंपरा और ऐतिहासिक नामों को आगे बढ़ाया है।
इस युद्धपोत की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसका स्वदेशी निर्माण शामिल है। अमिनी का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों और घटकों के साथ किया गया है। यह भारत के घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अमिनी की भारतीय नौसेना को डिलीवरी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूती प्रदान करती है। साथ ही यह उपलब्धि स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में भारतीय शिपयार्ड और घरेलू रक्षा उद्योग की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।

