तवांग मठ में 21 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन, 7 नवंबर तक जारी रहेगी प्रदर्शनी
21,000 से अधिक श्रद्धालु बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन करने के लिए तवांग मठ पहुंचे। यह प्रदर्शनी 7 नवंबर, 2026 तक खुली रहेगी।

तवांग, अरुणाचल प्रदेश : अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध तवांग मठ में भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अब तक 21 हजार से अधिक श्रद्धालु गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) पहुंचकर पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं। यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए 7 नवंबर 2026 तक खुली रहेगी।
तवांग और अरुणाचल प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मठ पहुंच रहे हैं। 13 वर्षों बाद भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की अरुणाचल प्रदेश वापसी के कारण इस आयोजन का विशेष ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली से लाए गए इन अवशेषों के दर्शन का अवसर बौद्ध भिक्षुओं, ननों और आम लोगों को मिल रहा है।
इन पवित्र अवशेषों की खोज वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में हुई थी। पुरातात्विक दृष्टि से यह खोज बौद्ध धर्म के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। वर्तमान में ये अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संरक्षित हैं।
इस अवसर पर तवांग मठ में बौद्ध विरासत को प्रदर्शित करने के लिए दो विशेष प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) की प्रदर्शनी ‘अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा’ में अवशेषों की खोज और उनके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाया गया है। वहीं, राष्ट्रीय संग्रहालय की प्रदर्शनी ‘क्रॉसरोड्स ऑफ धम्मा’ में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है।
तवांग मठ के बाद पवित्र अवशेषों को 8 से 13 नवंबर तक टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला और 14 से 20 नवंबर तक गोल्डन पैगोडा, नामसाई में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 21 नवंबर 2026 को अवशेषों को राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली वापस ले जाया जाएगा।
इस प्रदर्शनी का आयोजन संस्कृति मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और अरुणाचल प्रदेश सरकार के सहयोग से किया है। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार के साथ भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, ज्ञान और वैश्विक भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।




