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भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 : जमीनी स्तर पर जल सुरक्षा को मजबूत कर रही सामुदायिक भागीदारी

आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू-2026 का 9वां संस्करण 22 से 26 सितंबर, 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित

नई दिल्ली : भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) 2026 में जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में समुदायों, स्थानीय संस्थाओं और तकनीक के समन्वय से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल स्रोतों के संरक्षण और नदियों के पुनरुद्धार के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह की शुरुआत 2012 में हुई थी। यह हर दो वर्ष में आयोजित होने वाला मंच है, जहां नीति-निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग जगत और अन्य हितधारक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन पर विचार-विमर्श करते हैं।

पिछले एक दशक में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने जल शक्ति अभियान, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन, अटल भूजल योजना, मिशन अमृत सरोवर और जल संचय जन भागीदारी जैसी कई पहलें शुरू की हैं। वहीं, एनएक्यूयूआईएम 2.0 के माध्यम से क्षेत्र-विशिष्ट भूजल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

इन प्रयासों के बीच देश के कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण में भी बदलाव दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 में 432 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) से बढ़कर 2025 में 448.52 बीसीएम हो गया।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में जल संरक्षण को सामुदायिक प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया गया है। जल संचय जन भागीदारी 2.0 के तहत जून 2025 से मई 2026 के बीच जिले में करीब 2.84 लाख पुनर्भरण से जुड़े ढांचे बनाए गए।

इनमें चेक डैम, रिचार्ज पिट और कंटूर ट्रेंच जैसी संरचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, 14.3 किलोमीटर लंबे मौसमी तवेरा नाला के पुनरुद्धार के तहत इसके किनारे 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं। इन प्रयासों से करीब 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल के संरक्षण और भूजल स्तर में अनुमानित 5 से 10 फीट सुधार की उम्मीद है।

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त्रिपुरा के खोवाई जिले में ग्रामीण जलापूर्ति और जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, स्कूलों और अन्य स्थानीय हितधारकों को जोड़ा गया है।

जिले में 6,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं समुदाय को जागरूक और संगठित करने में भूमिका निभा रही हैं। स्कूल वाटर क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) से पानी की गुणवत्ता की बुनियादी जांच करना भी सिखाया जा रहा है।

ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी के लिए जियो-टैग आधारित व्यवस्था, तीसरे पक्ष से गुणवत्ता जांच तथा जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) और जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जल जीवन मिशन को जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ते हुए नदियों के पुनरुद्धार के प्रयास किए गए हैं। ‘धारा से धरोहर तक’ अभियान के तहत बान नदी को करीब 42 किलोमीटर और सोट नदी को लगभग 17 किलोमीटर तक पुनर्जीवित किया गया।

इस पहल का विस्तार पड़ोसी जिलों की नदियों तक भी किया गया है, जिसमें बिजनौर की मालन और कुशीनगर की हिरण्यावती नदी शामिल हैं।

ग्राम सभा के माध्यम से निगरानी, ‘पानी की पाठशाला’ और महिलाओं की अगुवाई में पानी की गुणवत्ता की जांच जैसी गतिविधियों के जरिए समुदायों को जल संसाधनों के संरक्षण से जोड़ा गया है।

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ओडिशा में ‘कैच द रेन 2026’ अभियान के तहत शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को भूजल विज्ञान, जल चक्र और वर्षा जल संचयन के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

राज्य में वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण को लेकर नुक्कड़ नाटक, लोक प्रदर्शन और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए 968 सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां आयोजित की गई हैं।

इसके साथ ही वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए 905 संरचनाएं बनाई गई हैं। इनमें 849 वर्षा जल संचयन प्रणालियां और 56 रिचार्ज शाफ्ट शामिल हैं। जाजपुर में 45 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं। राज्य के सभी 30 जिलों में 98 टैंकों की मरम्मत और डी-सिल्टिंग का काम भी शुरू किया गया है।

भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के दौरान सामने आए ये उदाहरण दिखाते हैं कि जल सुरक्षा केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। इसके लिए सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक योजना, स्थानीय संस्थाओं के बीच समन्वय और निरंतर निगरानी की भी आवश्यकता है।

आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू 2026 देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के अनुभवों को साझा करने तथा टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन के उपायों पर चर्चा के लिए एक मंच उपलब्ध करा रहा है। जमीनी स्तर पर हो रहे ये प्रयास जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

Amresh Dwivedi

अमरेश द्विवेदी देश की एकमात्र बहुभाषी न्यूज़ एजेंसी हिंदुस्थान समाचार में कार्यरत हैं। इसके अलावा हिंदुस्थान समाचार की पाक्षिक पत्रिका युगवार्ता और मासिक पत्रिका नवोत्थान के साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी उनके आलेख छपते रहते हैं।

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