ई20 पेट्रोल नीति पर तहसीन पूनावाला का गडकरी और हरदीप सिंह पुरी पर हमला, 31 दिसंबर 2026 तक कार्रवाई की मांग
तहसीन पूनावाला ने भारत की E20 पेट्रोल नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का आरोप लगाया है और खाद्य महंगाई, किसानों तथा उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले खर्च को लेकर चिंता जताई है। 'टीम भारत' ने 31 दिसंबर 2026 तक इस पर कार्रवाई की मांग की है।

नई दिल्ली : टीम भारत के संस्थापक तहसीन पूनावाला ने केंद्र सरकार की ई20 पेट्रोल नीति को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इथेनॉल नीति में कथित हितों के टकराव, खाद्य महंगाई, किसानों की समस्याओं और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। संगठन ने 31 दिसंबर 2026 तक ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर संसद के बाहर प्रदर्शन और जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को टीम भारत के संस्थापक तहसीन पूनावाला, सह-संस्थापक दिनेश टांटिया और कोर मेंबर इशान भारद्वाज ने संबोधित किया। पूनावाला ने स्पष्ट किया कि संगठन इथेनॉल के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं है, बल्कि पर्याप्त पारदर्शिता, स्वतंत्र आकलन और उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान किए बिना ई20 को अनिवार्य रूप से लागू करने पर सवाल उठा रहा है।
उन्होंने बताया कि टीम भारत ने सरकार के साथ दो बैठकें की थीं। संगठन का सुझाव था कि जहां आर्थिक और तकनीकी रूप से संभव हो, वहां आयात पर विचार करने से पहले देश में उपलब्ध अतिरिक्त इथेनॉल का घरेलू उपयोग किया जाना चाहिए।
तहसीन पूनावाला ने नितिन गडकरी पर निशाना साधते हुए इथेनॉल उद्योग से जुड़े राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों और कारोबारों के संभावित हितों के टकराव की जांच की मांग की। उन्होंने इथेनॉल कंपनियों के स्वामित्व, राजनीतिक संबंधों, वित्तीय हितों और इस क्षेत्र में कारोबार करने वाली कंपनियों पर बड़े ऋणों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
पूनावाला ने आरोप लगाया कि ई20 नीति से आम नागरिकों को होने वाले लाभ और संभावित नुकसान का स्वतंत्र मूल्यांकन सामने नहीं रखा गया है। उन्होंने सरकार से ऐसे सत्यापित आंकड़े पेश करने को कहा, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि नीति के सार्वजनिक लाभ उसकी लागत और जोखिमों से अधिक हैं।
ये आरोप टीम भारत की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मंत्रियों का जवाब इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
टीम भारत ने ई20 नीति के संभावित आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि इथेनॉल उत्पादन का खाद्य कीमतों, पानी की उपलब्धता और कृषि संसाधनों पर क्या असर पड़ रहा है।
पूनावाला ने चीनी, चावल, अंडे, चिकन और मक्का की कीमतों का उल्लेख करते हुए त्योहारी सीजन में घरेलू बजट पर पड़ने वाले दबाव को रेखांकित किया। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे, पानी की कमी, गन्ना किसानों के विरोध प्रदर्शनों और कृषि समुदायों की आर्थिक चुनौतियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने किसानों की आत्महत्याओं को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से कृषि क्षेत्र पर इथेनॉल उत्पादन के प्रभाव का पारदर्शी आकलन कराने की मांग की। साथ ही, उत्पादन की लागत और पानी की खपत से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की अपील की।
पूनावाला ने इथेनॉल नीति की आलोचना पर नितिन गडकरी की कथित प्रतिक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि टीम भारत के सदस्यों की ओर से सवाल उठाए जाने पर उन्हें पहले ‘झूठा’ और ‘पैसे लेकर काम करने वाला एजेंट’ कहा गया था।
उन्होंने गडकरी की चुप्पी और हरदीप सिंह पुरी की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर भी सवाल उठाए। अपने संबोधन में पूनावाला ने राजनीतिक रूप से जुड़े कथित लाभार्थियों पर कटाक्ष करते हुए ‘बेटा बढ़ाओ योजना’ और गडकरी के लिए ‘शुगर डैडी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
टीम भारत ने नितिन गडकरी से बिना शर्त माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही, प्रधानमंत्री से हरदीप सिंह पुरी को पेट्रोलियम मंत्री के पद से हटाने तथा ई20 नीति को बढ़ावा देने में गडकरी की भूमिका की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
टीम भारत ने सरकार को 31 दिसंबर 2026 तक कार्रवाई करने की समय सीमा देने की बात कही। संगठन की मांग है कि हरदीप सिंह पुरी को पेट्रोलियम मंत्री के पद से हटाया जाए और नितिन गडकरी इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की अपनी भूमिका से पीछे हटें।
संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संसद के बाहर प्रदर्शन और जेल भरो आंदोलन किया जा सकता है। टीम भारत ने कहा कि वह ई20 नीति, खाद्य महंगाई, किसानों की परेशानी और सार्वजनिक पदों पर जवाबदेही के मुद्दे उठाता रहेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम भारत ने जातिगत भेदभाव को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की भूमिका पर भी चर्चा की। संगठन ने कहा कि कमजोर समुदायों की सुरक्षा के साथ निष्पक्ष जांच, उचित कानूनी प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही भी जरूरी है।
पूनावाला ने हेमंत सोरेन और प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े विवाद तथा दिल्ली पुलिस के एसीपी दहिया से संबंधित मामले का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच और झूठे आरोपों से बचाव के उपायों पर चिंता जताई।
उन्होंने आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षक का सम्मान भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। टीम भारत ने उनके प्रति समर्थन जताया और कहा कि कानून के तहत जहां अनुमति हो, वहां एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक शिकायतों से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा प्रभावित किए बिना निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में टीम भारत ने ई20 नीति के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने, संभावित हितों के टकराव की स्वतंत्र जांच कराने और किसानों तथा उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान करने की मांग दोहराई।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह सरकार से जवाबदेही की मांग जारी रखेगा। ई20 नीति पर उठाए गए आरोपों और मांगों को लेकर संबंधित मंत्रियों तथा केंद्र सरकार का पक्ष सामने आने पर इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


