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Lon Nadi Unnao: वरदान से अभिशाप बनी लोन नदी—टेनरी-स्लॉटर हाउस का जहर, प्रशासन की आंखों में धूल, हजारों परिवार बीमार

कभी जीवनदायिनी थी, आज जहर उगलती नाली बन चुकी

उन्नाव के शिव नगर से लेकर चांदपुर और आगे पुरवा-बीघापुर-सुमेरपुर तक फैली Lon Nadi कभी इस इलाके की जीवनरेखा हुआ करती थी। उसके किनारे बसे दर्जनों गांवों की खेती-बाड़ी, पशुपालन और रोजमर्रा की जरूरतें इसी नदी से पूरी होती थीं। लेकिन आज वही नदी काले, गाढ़े और रासायनिक गंदे पानी की नाली बन चुकी है। पानी इतना जहरीला हो गया है कि लोग उसे छूने से भी कतराते हैं। नदी किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवार गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। यह सिर्फ पर्यावरण की कहानी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, औद्योगिक मनमानी और राजनीतिक वादों के खोखलेपन की कहानी है।

दही चौकी का काला सच: रात में टैंकर, सुबह में जहर

आस पास के लोगों का कहना है कि उन्नाव औद्योगिक क्षेत्र, खासकर दही चौकी में संचालित स्लॉटर हाउस और टेनरियों से निकलने वाला अनुपचारित अपशिष्ट सीधे नालों के जरिए लोन नदी में बहाया जा रहा है। दिसंबर 2025 में दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट किया था कि रात के अंधेरे और कोहरे का फायदा उठाकर टैंकरों से भी दूषित पानी नदी और नालों में उतारा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दही औद्योगिक क्षेत्र की सैकड़ों फैक्ट्रियां प्रतिदिन हजारों लीटर जहरीला अपशिष्ट छोड़ रही हैं। स्लॉटर हाउस भी मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के आदेशों का उल्लंघन करते हुए अपनी गंदगी सीधे नदी में बहा रहे हैं।

नवंबर 2025 की रिपोर्ट ने खोली पोल, मछलियां मर रहीं, खेत बंजर हो रहे

नवंबर 2025 में अमर उजाला ने लिखा था कि टेनरियों के प्रदूषित पानी ने लोन नदी को पूरी तरह काला और विषैला बना दिया है। आसपास के गांवों का भूगर्भ जल भी दूषित हो गया है और पानी फसलों की सिंचाई लायक नहीं बचा। दिसंबर 2025 में ही सुमेरपुर से भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया कि नदी में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि मछलियां मर रही हैं। बीघापुर, पुरवा और पाटन क्षेत्र के परसंडा, साहबगंज, दैता, भैरमपुर, पोरई समेत दर्जनों गांव प्रभावित हैं। कभी उपजाऊ खेत अब बंजर हो रहे हैं।

बीमारियों का तांडव: त्वचा से लेकर किडनी-लीवर तक, मौतों को मुआवजे में दबाया

शिव नगर से चांदपुर तक के लोग नदी में बहते केमिकल युक्त काले पानी की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं। त्वचा रोग, खुजली, एक्जिमा से लेकर किडनी और लीवर संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। फ्लोराइड और रासायनिक अवशेषों की वजह से मिट्टी की गुणवत्ता भी घट गई है। मार्च 2026 में तरुण मित्र में विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान ने इस मुद्दे को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि कई स्लॉटर हाउस और टेनरियां निर्धारित नियमों के अनुसार सीईटीपी का उपयोग नहीं कर रही हैं। बिना शोधन के गंदा और रासायनिक पानी नालों में बहाया जा रहा है, जिससे गांवों का पानी भी दूषित हो रहा है। जब जांच की सूचना मिलती है तो मशीनें चालू कर दी जाती हैं, बाकी समय अनुपचारित पानी बहता रहता है। मजदूरों की मौतें भी सामने आई हैं। सुरक्षा उपकरणों के अभाव, जहरीली गैस के रिसाव या अन्य कारणों से जानें गईं, लेकिन मौतों को मुआवजे में तौलकर लोगों के मुंह बंद कर दिए गए।

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फरवरी 2026 की औचक रिपोर्ट: सीसीटीवी गायब, कैमरा डिस्कनेक्ट, बिना रिकॉर्ड घुसे वाहन

फरवरी 2026 में हिन्दुस्तान ने इंडस्ट्रियल एरिया साइट-2 स्थित एक पशुवधशाला इंडाग्रो फूड्स पर आधी रात के औचक निरीक्षण की रिपोर्ट छापी। हलाल स्थल पर सीसीटीवी ही मौजूद नहीं थे, अनलोडिंग प्वाइंट का कैमरा डिस्कनेक्ट था और बिना रिकॉर्ड के वाहन घुसे हुए मिले। यह साफ संकेत है कि निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है और जांच से बचने के लिए हर तरह की कोशिश की जा रही है।

सीपीसीबी की चेतावनी, छह साल बाद भी अधूरा सीईटीपी अपग्रेडेशन

अक्टूबर 2025 में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानी सीपीसीबी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखकर उन्नाव समेत जाजमऊ और बंथर के टेनरी क्लस्टर में वेस्टवाटर ट्रीटमेंट के उल्लंघन पर कार्रवाई करने को कहा। सीपीसीबी ने साफ कहा कि सीईटीपी सही तरीके से संचालित और मेंटेन नहीं हो रहे। दिसंबर 2025 में हिन्दुस्तान ने रिपोर्ट किया कि सीईटीपी प्लांट्स का अपग्रेडेशन छह साल बाद भी अधूरा है। एनजीटी के मानकों के अनुसार 2025 तक काम पूरा होना था, लेकिन समयसीमा बढ़ाकर मार्च 2026 कर दी गई। मार्च 2026 में टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर छापी कि दही औद्योगिक क्षेत्र की एक टेनरी को दूषित पानी छोड़ने और बदबू फैलाने के आरोप में यूपीपीसीबी ने सील कर दिया। बिजली भी काट दी गई। लेकिन सवाल यह है कि एक टेनरी पर कार्रवाई काफी है क्या?

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कानून क्या कहता है, और लोन नदी कहां खड़ी है

सीपीसीबी के अनुसार स्लॉटर हाउस और मीट प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए एफ्लुएंट स्टैंडर्ड्स यानी पर्यावरण संरक्षण नियम 2016 के संशोधन के तहत पीएच 6.5 से 8.5, बीओडी अधिकतम 30 मिलीग्राम प्रति लीटर, सीओडी 250 मिलीग्राम प्रति लीटर, सस्पेंडेड सॉलिड्स 50 मिलीग्राम प्रति लीटर और ऑयल एंड ग्रीस 10 मिलीग्राम प्रति लीटर तय किए गए हैं। वहीं नदी के पानी के लिए स्नान योग्य यानी क्लास बी मानक और भी सख्त हैं, जिसमें बीओडी 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और डीओ 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा होना चाहिए। लोन नदी इन मानकों से कोसों दूर है।

जिला प्रशासन से पांच सवाल, जिनका जवाब जरूरी है

उन्नाव के जिला मजिस्ट्रेट से ये सवाल पूछे जाने चाहिए। पहला, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक लोन नदी में टैंकरों और नालों से दूषित पानी छोड़ने की शिकायतों पर कितनी एफआईआर दर्ज हुईं और कितने जुर्माने लगे? दूसरा, सभी स्लॉटर हाउस और टेनरियों के सीईटीपी और ईटीपी का नवीनतम निरीक्षण रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी? तीसरा, फरवरी 2026 के स्लॉटर हाउस निरीक्षण में पाई गई सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग की अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई हुई? चौथा, सीईटीपी अपग्रेडेशन की नई समयसीमा मार्च 2026 पूरी हुई या नहीं? पांचवां, प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य शिविर की तत्काल व्यवस्था कब तक सुनिश्चित होगी?

साहित्यिक नगरी की मिट्टी से निकल रहा जहर, अगली पीढ़ी माफ नहीं करेगी

उन्नाव को साहित्यिक नगरी कहा जाता है। लेकिन आज उसी मिट्टी से निकलने वाली नदी जहर उगल रही है। दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक स्थानीय अखबारों और सीपीसीबी की चेतावनियों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। यह सिर्फ एक नदी की मौत की कहानी नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की कहानी है जो रोज बीमार पड़ रहे हैं, जिनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं और जिनके सवालों का कोई जवाब नहीं मिल रहा। प्रशासन अगर अब भी आंखें मूंदे रहता है तो आने वाली पीढ़ियां इस लापरवाही को कभी माफ नहीं करेंगी।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

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