देश

Media Update: इजरायल-ईरान तनाव के बीच न्यूज़ चैनलों की TRP पर रोक, सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और उससे जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में बढ़ती सनसनीखेज शैली को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को कड़ा निर्देश जारी करते हुए न्यूज़ टीवी चैनलों की टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (TRP) की रिपोर्टिंग को तत्काल प्रभाव से चार सप्ताह के लिए रोकने का आदेश दिया है।

सरकार का मानना है कि टीआरपी की अंधी दौड़ में न्यूज़ चैनल युद्ध जैसी गंभीर स्थिति को अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाकर पेश कर रहे हैं, जिससे जनता में भय और भ्रम का माहौल पैदा हो रहा है।

Background of the Decision

पिछले कुछ दिनों से इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष की खबरों को लेकर भारतीय न्यूज़ चैनलों पर दिखाई जाने वाली सामग्री पर सवाल उठ रहे थे। मंत्रालय ने पाया कि कई चैनल युद्ध की विभीषिका को ग्राफ़िक्स और अटकलों के जरिए इस तरह पेश कर रहे हैं जो पत्रकारिता के मानकों के विपरीत है। विशेष रूप से उन परिवारों में गहरी चिंता देखी गई जिनके परिजन खाड़ी देशों या प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं।

यह भी पढ़ें  ‘पिता का सपना या सियासी रणनीति?’ आखिर क्यों डिप्टी CM नहीं बने निशांत कुमार, खुद खोला राज!

इसी पृष्ठभूमि में, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त निदेशक (BP&L) गौरीशंकर केसरवानी ने 6 मार्च 2026 को BARC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नकुल चोपड़ा को यह आधिकारिक निर्देश भेजा।

Key Developments: TRP पर रोक क्यों?

मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान कुछ न्यूज़ चैनल केवल अपनी रेटिंग बढ़ाने के लिए अनावश्यक सनसनी और अटकलों पर आधारित सामग्री प्रसारित कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस तरह की रिपोर्टिंग से आम जनता में घबराहट (Panic) फैलने की आशंका है।

आदेश में 16 जनवरी 2014 के ‘टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए नीति दिशानिर्देश’ का हवाला दिया गया है। इन नियमों के तहत रेटिंग एजेंसियों के लिए मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए BARC को निर्देश दिया गया है कि वह अगले चार सप्ताह तक न्यूज़ चैनलों का डेटा सार्वजनिक न करे।

Government’s Objective: जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा

सरकार का यह कदम सार्वजनिक हित (Public Interest) में उठाया गया है। मंत्रालय का तर्क है कि जब रेटिंग का दबाव नहीं होगा, तो न्यूज़ चैनल टीआरपी की होड़ से बाहर निकलकर अधिक जिम्मेदार और तथ्य-आधारित पत्रकारिता (Responsible Journalism) पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

यह भी पढ़ें  UP Scholarship Status Check 2026: PFMS और DBT से जानें स्कॉलरशिप आई या नहीं

आदेश में यह भी कहा गया है कि यह रोक चार सप्ताह तक या मंत्रालय के अगले निर्देश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य सनसनीखेज रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करना और न्यूज़ रूम में खबरों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना है।

Impact on Media Industry

इस फैसले के बाद मीडिया इंडस्ट्री और विज्ञापन जगत में नई बहस छिड़ गई है। न्यूज़ चैनलों के लिए टीआरपी वह पैमाना है जिसके आधार पर उन्हें विज्ञापन मिलते हैं। रेटिंग पर रोक लगने से चैनलों के राजस्व (Revenue) मॉडल पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, मीडिया विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग इसे सही कदम मान रहा है, क्योंकि युद्ध जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ‘इन्फोटेनमेंट’ के बजाय ‘इन्फर्मेशन’ की अधिक आवश्यकता होती है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस चार सप्ताह की अवधि में न्यूज़ चैनलों की रिपोर्टिंग शैली में कोई सकारात्मक बदलाव आता है। सरकार के इस सख्त रुख ने अन्य ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी एक कड़ा संदेश भेजा है।

Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, क्राइम इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर और डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन) में बतौर डिजिटल हेड की सेवाएं दीं और प्राइम टीवी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के रूप में न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की डिजिटल ग्रोथ, ऑडियंस एंगेजमेंट और मल्टी-प्लेटफॉर्म मीडिया स्ट्रैटेजी पर महत्वपूर्ण काम किया। क्राइम इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर उन्होंने कई न्यूज़ चैनलों के लिए अंडरकवर/स्पाई-स्टाइल रिपोर्टिंग, स्टिंग ऑपरेशन और फील्ड इन्वेस्टिगेशन किए। संगठित अपराध, साइबर क्राइम, ड्रग्स सिंडिकेट, मानव एवं गौवंश तस्करी और फर्जीवाड़े जैसे विषयों पर उनकी इन्वेस्टिगेशन चर्चित रहीं। कई संवेदनशील मामलों में उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को जरूरी इनपुट व सहयोग उपलब्ध कराया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button